ग्वालियर
बिरला नगर स्टेशन के पास गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात मालगाड़ी के डिरेलमेंट और भोपाल एक्सप्रेस से टक्कर के मामले की जांच के लिए चीफ सेफ्टी ऑफिसर के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी ने शनिवार से अपनी जांच शुरू कर दी है। सीएसओ ने मालगाड़ी के चालक से पूछा कि जब डिरेलमेंट हुआ तो आपको पता नहीं चला, यदि पता था तो मैसेज क्यों नहीं किया। मालगाड़ी चालक का कहना था कि मैसेज किया था।


हादसे के बाद मालगाड़ी को झांसी भेज दिया गया था। साथ ही पायलट एवं गार्ड को भी झांसी में ही रोका गया था। कमेटी के चेयरमैन सीएसओ एसके कश्यप के समक्ष बिरला नगर स्टेशन प्रबंधक, मालगाड़ी के चालक, गार्ड सहित 26 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक मालगाड़ी के चालक ने कोई पार्ट गिरने की बात कही है। अफसरों का कहना था कि जब मालगाड़ी के सिग्नल नहीं आए तो आपने नीचे उतरकर चेक क्यों नहीं किया। वहीं बिरला नगर स्टेशन प्रबंधक से भी सवाल किया गया कि जब मालगाड़ी के चालक का मैसेज मिला तो आपने जांच के लिए भेजा या नहीं भेजा था। क्योंकि यदि भेजा होता तो डिरेलमेंट की जानकारी पहले ही लग जाती। कुल मिलाकर कमेटी के कड़े सवालों ने मालगाड़ी चालक से लेकर बिरला नगर स्टेशन प्रबंधक के भी होश उड़ा दिए हैं।
50 मिनट खड़ी रही ट्रेनः
मालगाड़ी के चालक ने गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात करीब 2.30 बजे सिग्नल नहीं मिलने की सूचना दी थी। इसके बाद गाड़ी 50 मिनट खड़ी रही, लेकिन डिरेलमेंट की जानकारी किसी को नहीं मिली, यह बात जांच कमेटी को सबसे अधिक खटक रही है।
1.40 घंटे का ब्लॉकः हादसे के दौरान ओएचई लाइन के खंबे क्षतिग्रस्त हो गए थे। जिनको क्रेन के जरिए खड़ा कर दिया गया था। साथ ही ट्रैक पर भी काम होना था। इसके चलते शनिवार को दोपहर 2 बजे से 3.40 बजे तक ब्लॉक लिया गया। जिसमें रिपेयरिंग का काम किया गया है। इस दौरान स्टेशन प्रबंधक राजेश शुक्ला ने भी बिरला नगर में घटना स्थल पर पहुंचकर मरम्मत कार्य का जायजा लिया है। इस काम में कई प्रकार की मशीनों का प्रयोग होता है, इसलिए वरिष्ठ अफसर मौजूद रहते हैं।
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