ग्वालियर-
आश्रम शांति निकेतन में 2017 में मानसिक रोगी नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद एक और बड़ी चूक सामने आई है। खुलासे के फौरन बाद पीड़िता का मेडिकल किए जाने का नियम है जिसके लिए हजीरा थाना पुलिस मंगलवार को बच्ची को माधव बाल निकेतन से लेने पहुंची। यहां निकेतन की अधीक्षिका ने मना कर दिया और परमिशन दिखाने को कहा। पुलिस लौट आई और जब महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को पत्र लिख मेडिकल के लिए कहा तो उनका जवाब भी यह आया कि-देखते हैं विचार किया जाएगा। इतने गंभीर मामले में सबसे महत्वपूर्ण इकाई माने जाने वाली बाल कल्याण समिति का यह रवैया हैरत में डालने वाला है। वहीं समिति के अध्यक्ष डॉ केके दीक्षित ने हजीरा थाने की महिला एसआई त्रिवेणी राजावत को आश्रम शांति निकेतन तक में पड़ताल करने से मना किया
17 साल की नाबालिग के साथ आश्रम शांति निकेतन में बुजुर्ग विमलचंद द्वारा दुष्कर्म किया गया जिसका खुलासा अब बच्ची ने 26 मार्च 2019 को काउंसिलिंग के दौरान किया। इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग ने काउंसिलिंग के खुलासे की रिपोर्ट एसपी को भेजी थी जिसके बाद पुलिस ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए एफआईआर के लिए कहा। एफआईआर के लिए पत्र बाल कल्याण समिति को लिखा गया लेकिन समिति ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। समिति के अध्यक्ष केके दीक्षित ने महिला एवं बाल विकास विभाग से कहा कि बच्ची ने काउंसर की काउंसलिंग में कुछ और बताया था और हमारी काउंसलिंग में कुछ ऐसा गंभीर नहीं बताया। सीडब्ल्यूसी इस मामले को लगातार टालती रही जिसका नतीजा यह कि 26 मार्च को जब दुष्कर्म की बात सामने आई तब भी अब जाकर एफआईआर हुई। इस मामले में बच्ची की काउंसलिंग से लेकर अब तक सीडब्ल्यूसी के सहयोग न करने के कारण एफआईआर नहीं हो सकी थी।
एडीजे पहुंचे निकेतन,3 बिंदुओं पर मांगी जानकारी
हाईकोर्ट के निर्देश पर बाल गृहों की मॉनिटरिंग के लिए न्यायाधीशों को जिम्मेदारी दी गई है जिसमें समय समय पर जांच की जाती है। मंगलवार को एडीजे एवं ऑब्जर्वर सचिन शर्मा और एडीजे शिवकांत गोयल माधव बाल निकेतन पहुंचे। यहां बच्ची से दुष्कर्म के मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग और स्टाफ से जानकारी ली। एडीजे श्री शर्मा और गोयल की ओर से तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है जिसमें पीड़िता की हिस्ट्रीशीट, अपराध क्रमांक और बच्ची की बेहतरी के लिए क्या किया जा सकता है। वहीं बच्ची से दुष्कर्म के मामले में कोर्ट को रिपोर्ट भी दी जाएगी।
बच्च्यिों ने दिए बयान-रोकता था,टॉफी भी देता था
आश्रम शांति निकेतन की चार बच्चियों के बयान पुलिस ने दर्ज किए हैं। इनमें यही सामने आया है कि पीड़िता को आरोपी ज्यादा तवज्जो देता था और टॉफी तो कभी अलग अलग चीजें देता था। सभी बच्च्चियों के बीच वह सिर्फ पीड़िता को कभी कभी रोक लेता था और गलत जगह छेड़छाड करता था। खुलासा तब हुआ जब पीड़िता ने विमलचंद वाली हरकतें अपनी साथी बच्ची के साथ कीं। साथी बच्ची ने शिकायत की तो पीड़िता से पूछा गया कि वह साथी बच्ची के साथ ऐसा क्यों करती है,तब उसने विमलचंद का खुलासा किया।
कौन है पीड़िता
2011 में तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी सीमा शर्मा ने इस बच्ची को जनसुनवाई में आने पर अनाथालय भेजा था,यह आश्रम शांति निकेतन तब बाल गृह नहीं था। 2013 में संचालक मस्तराम को बालगृह की मान्यता मिली। 2015 में इस पीडिता को शिवपुरी के गृह में भेजा गया लेकिन वहां से डेढ़ माह बाद ही वापस भेज दिया गया। इस बच्ची के माता-पिता दुनिया में नहीं हैं और पन्ना की रहने वाली है। पिछोर से एक बार मौसा मौसी लेने आए और डेढ माह बाद वापिस छोड़ गए। 2018 में यह पीड़िता 18 साल की पूर्ण हुई जिसके बाद इसे माधव बाल निकेतन शिफ्ट कर दिया गया।
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal