ग्वालियर-
हाईकोर्ट की युगलपीठ ने प्री पीजी फर्जीवाड़े के आरोपी शक्ति सिंह किरार के गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि भावनात्मक आधार पर उनकी याचिका नहीं सुनी जा सकती है। निचली कोर्ट ने वारंट जारी करने में कोई गलती नहीं की है। इसलिए याचिका खारिज की जाती है। शक्ति सिंह किरार पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य गुलाब सिंह किरार के बेटे हैं।

सीबीआई ने प्री पीजी फर्जीवाड़े में 15 फरवरी को चालान पेश किया था। इस फर्जीवाड़े में शक्ति सिंह को आरोपी बनाया है। शक्ति सिंह किरार ने वर्ष 2011 में प्री पीजी दी थी। ओएमआर शीट में गोले खाली छोड़ दिए थे। उसके बाद व्यापमं के अधिकारियों से मिलकर अपनी ओएमआर शीट व्यापमं से निकलवाई और गोलों को काला किया। इस वजह से प्री पीजी में प्रदेश में शक्ति सिंह ने पहली रैंक हासिल की थी। जब सीबीआई ने जिला सत्र न्यायालय में चालान पेश किया तो शक्ति सिंह किरार उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने उसका गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। जेल जाने से बचने के लिए शक्ति सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजीव शर्मा ने तर्क दिया कि 12 फरवरी को अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन उस दिन वकीलों की हड़ताल होने की वजह से सुनवाई नहीं हो पाई और सीबीआई ने 15 फरवरी को चालान पेश कर दिया। सीबीआई ने अपने चालान में शक्ति सिंह की गिरफ्तारी की जरूरत नहीं बताई है। वर्ष 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश दिया था कि जिला न्यायालय सीधे गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं कर सकता है। इसलिए वारंट पर रोक लगाई जाए। 3 अप्रैल को बहस के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। सोमवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2008 में इंदरमोहन के केस में जो फैसला लिया था, वह फैसला शक्ति सिंह किरार के वारंट पर लागू नहीं होता है। क्योंकि दोनों केसों के तथ्य अलग-अलग हैं। वैसे भी वकीलों की हड़ताल अवैध है। अगर किसी का नुकसान हुआ है तो उसके लिए वकील जिम्मेदार हैं। याचिका में भावनात्मक तथ्य पेश किए हैं। याचिका को खारिज किया जाता है।
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