ग्वालियर-
विशेष सत्र न्यायालय ने 500 रुपए की रिश्वत लेने वाले पटवारी डालचन्द्र आर्य को चार साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी को सजा काटने के लिए जेल भेज दिया।

गजेन्द्र मुदगल निवासी मावठा भितरवार ने मोती महल स्थित लोकायुक्त कार्यालय में 8 अप्रैल 2013 को शिकायत की। उसने बताया कि मावठा में 31 मई 2012 को कल्याण सिंह से अपने नाबालिग पुत्र के नाम जमीन खरीदी थी। इस जमीन के नामांतरण के लिए पटवारी डालचन्द्र आर्य को आवेदन दिया। उसने नामांतरण के बदले में 500 रुपए की रिश्वत मांगी थी। नामांतरण होने के बाद मूल रजिस्ट्री व ऋण पुस्तिका मांगी तो वह पैसे मांगने लगे। पटवारी को रिश्वत देते हुए रंगे हाथ पकड़वाना चाहता हूं। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने उसे टैप रिकार्डर दिया, जिसमें उसकी आवाज रिकार्ड हो गई। रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद उसे रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया। पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। जांच कर कोर्ट में चालान पेश किया। आरोपी ने बचाव में कहा कि उसके खिलाफ साक्ष्य नहीं है। लोकायुक्त पुलिस ने झूठा फंसाया है। दोषमुक्त किया जाए। विशेष लोक अभियोजक अरविंद श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। अगर आरोपी को सजा देने में नरमी बरती जाती है तो समाज में गलत संदेश जाएगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को चार की सजा सुनाई है और उसे सजा काटने के लिए जेल भेज दिया
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