ग्वालियर
जीआरएमसी के रेडियोलॉजी विभाग में पदस्थ रेडियोग्राफर/ सीटी टेक्नीशियन की कैंसर के चलते इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन का आरोप था कि रेडिएशन के कारण ही रेडियोग्राफर को कैंसर हुअा है। नाराज परिजन एंबुलेंस में रेडियोग्राफर के शव को लेकर डीन कार्यालय पहुंच गए और पोर्च में एंबुलेंस खड़ी करके मुख्यद्वार पर धरने पर बैठ गए। उन्हाेंने कर्मचारियों को भी अंदर जाने से रोक दिया। मामले का पता चलते ही डीन मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतक रेडियोग्राफर को श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद परिजन से चर्चा की और उन्हें 50 हजार रुपए का चेक आर्थिक सहायता के लिए दिया। साथ ही अनुकंपा नियुक्त दिलाने का भी आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन वहां से हटे।
नाका चंद्रबदनी निवासी नरेंद्र नरवरिया(42) 2014 से रेडियोग्राफर/ सीटी स्कैन टेक्नीशियन के पद पर पदस्थ थे और सीटी स्कैन में ड्यूटी करते थे। नरेंद्र के भाई राजू नरवरिया ने बताया कि सीटी स्कैन रूम में रेडिएशन से बचाव के कोई इंतजाम नहीं थे, जिसके कारण उनके भाई को अगस्त में कैंसर हो गया। कर्जा लेकर वह अपने भाई का इलाज करा रहे थे। जेएएच प्रशासन ने मदद करना तो दूर उनके भाई का हालचाल तक नहीं पूछा। कैंसर हॉस्पिटल में इलाज के दौरान नरेंद्र की बुधवार की सुबह मौत हो गई। नरेंद्र के शव को एंबुलेंस में लेकर परिजन जीआरएमसी पहुंच गए। नरेंद्र की प|ी पुष्पा नरवरिया और बेटी हर्षिता व बेटा हर्षित सहित अन्य परिजन डीन कार्यालय के मुख्य द्वार पर बैठकर विलाप करने लगे। परिजन ने कॉलेज के कर्मचारियों को भी अंदर नहीं जाने दिया। इसकी जानकारी लगते ही डीन डॉ. भरत जैन मौके पर पहुंच गए और उन्होंने मृतक नरेंद्र नरवरिया को श्रद्धासुमन अर्पित कर परिजन को कार्यालय में बुलाया। डीन ने कहा कि कॉलेज प्रशासन इस दुख की घड़ी आपके परिवार के साथ है। परिजन ने आर्थिक सहायता की मांग की तो डीन ने कहा कि कॉलेज प्रशासन की तरफ से आर्थिक सहायता के तौर पर 50 हजार रुपए का चेक अभी दे रहे हैं। अनुकंपा नियुक्ति जल्द से जल्द दिलाने की प्रयास किया जाएगा। परिजन बोले, तब तक नरेंद्र की प|ी और बच्चों का गुजारा कैसे होगा? इस पर डीन ने कहा जब तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं होती है, तब तक बीवीजी कंपनी में वह नौकरी लगवा देंगे। इसके बाद परिजन शव लेकर चले गए।
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