ग्वालियर- दिल्ली में इलाज के दौरान स्वाइन फ्लू के शिकार एक और मरीज की मौत हो गई। स्वाइन फ्लू से जिले में 41 दिन में 7 लोगों की मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर गंभीर नहीं है। मरीजों के यहां स्वास्थ्य विभाग की टीम सिर्फ खानापूर्ति करने जा रही है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिला।

गोल पहाड़िया स्थित जयश्रीराम कॉलोनी में स्वाइन फ्लू से जिस महिला की मौत हुई उसके घर टीम तो पहुंची लेकिन टीम के पास टैमीफ्लू ही नहीं थी। महिला के पति का कहना है कि उसके छोटे भाई की गर्भवती पत्नी को भी वही दिक्कत हो रही है, जो उसकी पत्नी को थी। बार-बार कहने पर भी उन्हें टैमीफ्लू ही नहीं मिली। उधर, स्वाइन फ्लू से मरने वाले तारागंज निवासी युवक के घर तो टीम बुधवार को गई ही नहीं।
इलाज के लिए ले गए थे दिल्ली: गेरू वाला बंगला, मुरार निवासी नरेश जैन को तीन दिन पहले स्वाइन फ्लू की आशंका के चलते परिजन इलाज के लिए दिल्ली ले गए, जहां उनकी मौत हो गई। पार्षद बृजेश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने सिविल सर्जन को इसकी जानकारी दी थी, जिसके बाद डॉक्टर की टीम दवा देकर आई है। उधर जिले में 41 दिन में 7 मरीजों की स्वाइन फ्लू से मौत और 22 मरीज पॉजिटिव निकलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर गंभीर नहीं है। गोल पहाड़िया स्थित जयश्रीराम कॉलोनी निवासी महेंद्र कुशवाह की पत्नी रजनी कुशवाह को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि मंगलवार को हुई थी। रजनी की मौत 9 मार्च को जेएएच में हो चुकी है।
बुखार की दवा लेकर पहुंची टीम: स्वास्थ्य विभाग की टीम महेंद्र कुशवाह के घर तो पहुंची लेकिन सिर्फ बुखार, सिर की दवा लेकर। उनके पास टैमीफ्लू ही नहीं थी। महेंद्र का कहना है कि उनके छोटे भाई की गर्भवती पत्नी को भी वही परेशानी हो रही है, जो रजनी को हो रही थी। डॉक्टर यह बोल गए कि टैमीफ्लू वह लेकर नहीं आए हैं। वह जेएएच जाकर दिखा लें। उधर, तारागंज निवासी राजकुमार गुप्ता की मौत सोमवार-मंगलवार की रात स्वाइन फ्लू से हुई थी। मृतक राजकुमार गुप्ता के चाचा राकेश गुप्ता का कहना है कि परिवार में 35 सदस्य हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम 4-5 पत्ते टैमीफ्लू के देकर गई है।
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