150 से अधिक कश्मीरी छात्र बगैर वैरीफिकेशन के रह रहे हैं शहर में
ग्वालियर-शहर में रह रहे 37500 से अधिक किराएदारों का रजिस्ट्रेशन पिछलेडेढ़ साल में हुआ है। शहर की पुलिस तो अन्य राज्यों को वैरिफिकेशन कर जवाब दे देती है, लेकिन दूसरे राज्यों की पुलिस ग्वालियर पुलिस को वैरीफिकेशन का जवाब नहीं देती है। इस कारण शहर में रह रहे दूसरे राज्यों के लोगों का वैरीफिकेशन करने में परेशानी आ रही है। सबसे अधिक परेशानी शहर में रह रहे 150 से अधिक कश्मीरी छात्रों के वैरीफिकेशन की है।

कलेक्टर के आदेश के अनुसार नौकर व किराएदार की सूचना एक निर्धारित फॉर्मेट में भरने के साथ आइडी प्रूफ व दो फोटों के साथ देना अनिवार्य हैं। नहीं देने पर मकान मालिक के खिलाफ कलेक्टर के आदेश के उल्लंघन का मामला दर्ज किया जा सकता है। पुलिस की तमाम कोशिशों के बाद भी मकान मालिक अपने किराएदार की सूचना देने के प्रति गंभीर नहीं है। पिछले डेढ़ साल में 37500 किराएदारों के वैरीफिकेशन के लिए आवेदन आए हैं।
शासन से किराया लेने के लिए छात्र कराते हैं वैरीफिकेशन – किराएदार के रूप में सबसे अधिक छात्र अपना वैरीफिकेशन कराने के लिए आवेदन देते हैं। क्योंकि वैरीफिकेशन की रसीद से ही शासन उन्हें निजी मकान में रहने का किराया देती है।
अन्य राज्यों की पुलिस वैरीफिकेशन की सूचना नहीं भेजती है
मकान मालिक किराएदार की सूचना आइटी सेल में देता है। इसके बाद आइडी प्रूफ के आधार पर उसे वैरीफिकेशन के लिए उसके संबंधित राज्य व थानों को पत्र भेजा जाता है। वहां से जानकारी आने पर किराएदार के आपराधिक रिकॉर्ड के संबंध में जानकारी दी जाती है। प्रदेश व जिला पुलिस को छोड़कर अन्य राज्यों की पुलिस वैरीफिकेशन की सूचना देने में रुचि नहीं लेती है।
कश्मीरी छात्रों का कैसे कराएं वैरीफिकेशन
काफी संख्या में कश्मीरी छात्र जीवाजी विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए आते हैं। कई बार इन छात्रों को लेकर बवाल मच चुका है। मकान मालिक कश्मीरी छात्रों को किराए पर रखने की जानकारी आइटी सेल को देते हैं। पुलिस उनके वैरीफिकेशन के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस को पत्र भेजती है, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आता है। जिसके कारण शहर में रह रहे 150 से अधिक कश्मीरी छात्रों का वैरीफिकेशन करना पुलिस के सामने बड़ी समस्या बना हुआ है, लेकिन मामला संवेदनशील होने के कारण पुलिस अधिकारी भी इस मामले में अधिकारिक रूप से बात करने से बच रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अन्य राज्यों से किराएदारों के वैरीफिकेशन के लिए पत्र व्यवहार किया जा रहा है।
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