ग्वालियर- ग्वालियर शहर केस्वच्छता सर्वे में खराब परफार्मेंस पर हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि ग्वालियर में गंदगी का अंबार है, नाली और सीवर की सफाई नहीं हो रही है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। उन्होंने कहा है कि नगर निगम से कहा कि यदि आपके अधिकारी काम नहीं करेंगे तो हम उन्हें दंडित करना शुरू कर देंगे। शहर में डेंगू के बाद स्वाइन फ्लू के प्रकोप पर भी नगर निगम को फटकार लगाई और अगले सप्ताह तक इसके रोकथाम के संबंध में रिपोर्ट मांगी है।
59वें नंबर पर ग्वालियर
स्वच्छता सर्वें में इस बार टॉप टेन में आना तो दूर, ग्वालियर 2018 की पोजीशन को भी बरकरार नहीं रख सका। पिछले साल की तुलना में स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान तीन माह के लिए करीब 1 हजार सफाई कर्मचारी अतिरिक्त लगाए, 5 करोड़ रुपए ज्यादा खर्च किए, लेकिन रैंकिंग में 31 पायदान नीचे गिर गए। पिछले साल 28वां स्थान था जबकि इस बार करीब 30 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी स्वच्छता सर्वे रिपोर्ट आने पर 59वें नंबर पर जा पहुंचे हैं।
30 करोड़ से ज्यादा खर्च, नतीजा जीरो
शहर की सफाई व्यवस्था के नाम पर नगर निगम ने पिछले छह माह में 30 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की। इसके बाद भी सभी वार्डों में न तो डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन शुरू हो पाया और न ही कचरे के ठिए खत्म कर बाजारों में डस्टबिन लगाए गए। बाजारों में रात्रिकालीन सफाई का दावा भी किया। लेकिन पिछले बुधवार को जारी स्वच्छ शहरों की रैंकिंग सूची में केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने इन सभी दावों को नकार दिया है।
सिटीजन फीडबैक अच्छा मिला, सेवाओं में पिछड़े
इस बार ग्वालियर को 5000 अंकों में से 3147 नंबर ही मिले हैं। खास बात यह है कि इसमें शहर के लोगों द्वारा भरपूर सहयोग दिया गया है। इसके चलते सिटीजन फीडबैक अच्छे अंक मिले हैं। लेकिन निगम द्वारा दी जा रहीं सेवाओं के मामले में हम काफी पिछड़ गए। सबसे ज्यादा नुकसान 850 अंकों का स्टार रेटिंग और ओडीएफ प्लस-प्लस में नहीं पहुंचने पर हुआ है। इसके अलावा 375 अंक लैंडफिल साइट चालू नहीं होने से हुआ है।
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