ग्वालियर– रिटायरमेंट के महज 99 दिन पहलेनगर निगम ग्वालियर के आयुक्त पद सेहटाए गए विनोद शर्मा को लेकर निगम केगलियारों से सियासी हलकों तक उठते तमामसवालों की हवा तेज हो गई है। हाल ही मेंकरीब महीने भर के भीतर उनके द्वारा जिसताबड़तोड़ तरीके से निगम अमले के थोकतबादले किए गए उनको लेकर तो निगम मेंएक नई बहस छिड़ गई थी और इसके तेजहोते-होते अंतत: उनकी विदाई हो गई।दरअसल श्री शर्मा का ग्वालियर में
बतौर निगमायुक्त दूसरा कार्यकाल पिछलेकाफी समय से विवादों में घिरा रहा।
खासकर नियमों को ताक पर रखकर निगमके महत्वपूर्ण पदों पर जिस तरीके से चुनिंदालोगों को बिठाया गया उसने तो उनकीसाख पर कई बार बट्टा लगाया। दरअसनिगम में विभिन्न की-पोस्ट्स पर नियमकायदों को दरकिनार कर की गर्इं तमामतैनानियों में उनके चंद करीबी लोगों कीभूमिका को लेकर चल पड़ी चर्चाएं नेमाहौल को काफी गरमा दिया । इनमें सबसेज्यादा किस्से निगमायुक्त के स्टेनो अंकुरगुप्ता के रहे।
हताश, सारा खेल स्टेनो के हाथ
पिछले कुछ सालों से निगम में नियम कानून की जिस कदर सरेआमछीछालेदर होती आ रही है उससे यहां आदर्श कार्मिक संरचना की बुरीतरह धज्जियां उड़ने का सिलसिला बहुत लंबा है। लंबा अर्सा हो गया
जब निगम अमले के महत्वपूर्ण पदों पर होने वाली अदला-बदली केतमाम आदेश जीएडी (सामान्य प्रशासन विभाग) से जारी ही नहीं किए
जाते। इस तरह के सारे आदेश निगम कमिश्नर के स्टेनो के माध्यम सेसीधे जारी किए जाने की नई परिपाटी धड़ल्ले से फलती-फूलती रहीहै। सूत्रों की मानें तो इस तरह के आदेश होने से पहले प्रस्ताव बनाने सेनोटसीट चलने और आदेश जारी होने तक सारा खेल इसी चैनल केमाध्यम से चलता रहा। इसके ऐवज में मोटी रकम के वारे-न्यारे किए
जाने के तमाम किस्से निगम के गलियारों में गूंज रहे हैं। इस बारे में
नित नए खुलासों के बीच कई कड़ियां अभी खुलना बाकी है।
जूनियर के अंडर में सीनियर
जो फंसे जांच में वो बने अफसर
निगम में चल रही अंधेरगर्दी का आलम ये है कि यहां चल पड़ेसेटिंग और लेन-देन के खेल में माहिर गोल के माध्यम से जोचाहो करवाने की खुली ठेका प्रथा ने निगम और आयुक्त कीछवि को बहुत आघात पहुंचाया है। हाल ये है कि पिछले काफीसमय से जारी तबादलों के खेल में कायदे कानून कोदरकिनार कर कई सीनियर्स को उनके जूनियर के अंडर में
तैनात कर दिया गया। कई सहायक वर्ग-3 के नीचे सहायकवर्ग-2 को बिठा दिए जाने से असंतोष और अराजकता
भड़की जा रही है।इसलिए भड़कता रहा आक्रोश
नियमों की अनदेखी: आदर्श कार्मिक संरचना कोदरकिनार कर पद और वेतनमान का पालन नहीं किया जाना
बेहिसाब सेटिंग:सहायक राजस्व निरीक्षकों (एआरआई)को वसूली के बजाय मलाईदार पदों पर बिठाना
खुली मनमानी:सहायक लेखापालों को लेखा शाखा केबजाय जीएडी और रैवेन्यू में बिठाकर दीगर काम लेना
भ्रष्टाचार को संरक्षण: लोकायुक्त जांच में फंसे दर्जनभर लोगों की महत्वपूर्ण पदों पर दनादन नियुक्तियां करना
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