ग्वालियर- जीवाजी यूनिवर्सिटी में वाकई परीक्षा और गोपनीय विभाग की व्यवस्थाएं बिगड़ गई हैं। वर्ष 2000 से पहले के टेबुलेशन चार्ट फटने लगे हैं, कई चार्ट में दीमक लग चुकी हैं। ऐसे में पुराने छात्रों को डुप्लीकेट मार्कशीट के लिए परेशान होना पड़ता है। 2 साल पहले रिजल्ट बनाने का काम कोलकाता की एजेंसी को दिया गया था। दिसंबर में इस एजेंसी का अनुबंध समाप्त हो गया है लेकिन एजेंसी ने जेयू को अब तक पुराने छात्रों का पूरा डेटा नहीं दिया है।
रिजल्ट पेंडिंग हैं और टेबुलेशन चार्ट भी तैयार नहीं किए हैं। इसका असर लगभग 5 हजार छात्रों के रिजल्ट पर पड़ा है। छात्र परेशान हो रहे हैं। नागपुर की नई एजेंसी ने काम संभाला है लेकिन यह एजेंसी भी जेयू अध्ययनशाला के छात्रों की परीक्षा का रिजल्ट अब तक नहीं दे पाई है। ऐसे में अब लगने लगा है कि जेयू की व्यवस्थाएं बिगड़ गई हैं और इनमें सुधार के लिए काम किए जाने की जरूरत है।
जेयू में 1964 से अब तक के चार्ट खराब होने लगे हैं। बार-बार निकाले जाने की वजह से इनके पन्ने फटने लगे हैं। 2000 से पहले के चार्ट को दीमक लगने लगी हैं। इन टेबुलेशन चार्ट को स्केन कराए जाने की योजना बनाई गई थी। लापरवाही के चलते चार्ट के स्केन कराए जाने की यह याेजना अब तक पूरी नहीं हो सकी। जबकि जेयू में कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट हैं। कंप्यूटर के एक्सपर्ट यहां मौजूद है, पूरा आईटी विभाग है लेकिन अब तक इन्हें स्केन करने के लिए बाहर की एजेंसी की सेवाएं लेने की बात ही होती रही है।
इसका नुकसान पुराने छात्रों को उठाना पड़ता है जिन्हें डुप्लीकेट मार्कशीट बनवानी है या फिर जिनका वेरिफिकेशन कराया जाना है। यह छात्र चक्कर लगाते रहते हैं। कभी इनका चार्ट नहीं मिलता है तो कभी कोई पेज गायब रहता है। आईके मंसूरी ने एजेंसी के अधिकारियों की बैठक लेकर एक सप्ताह में रिजल्ट देने का अल्टीमेटम भी दिया है। एजेंसी के प्रतिनिधि अमित वायगांवकर का कहना है कि यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों ने स्कीम देने में देर की थी, इस वजह से रिजल्ट में देरी हुई है।
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