ग्वालियर-बिजली कंपनी के उच्च स्तरीय प्रबंधन नेपहले तो नियमों को दरकिनार कर अपात्रअधिकारियों को चालू प्रभारी की रेवड़ी बाट दी।
कंपनी की इस नीति वह अधिकारी ठगे गए जोपदोन्नति की राह देख रहे थे। अब कंपनी दोबाराइन प्रभारों को बांटने की तैयारी में जिससे कंपनीके बैक फुट पर आए अधिकारियों के साथअन्याय हो रहा है।
चालू प्रभार की शुरुआत वर्ष 2012 में हुईजिसकी नींव पूरी तरह भ्रष्टाचार के दलदल मेंखड़ी थी। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनीइंदौर एवं पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनीजबलपुर में प्रमोशन की तरह पैनल बनाकरउर्पयुत सहवरियता के आधार पर चालू प्रभारदिए गए एवं दिए जा रहे हैं लेकिन मध्य क्षेत्रविद्युत वितरण कंपनी में नियमों को सरेआमदरकिनार किया जा रहा है।
यह हैं नियम
1-चालू प्रभार में उस पद का वेतनमान लेनासंबंधित अधिकारी को आवश्यक है लेकिन मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में न वेतनमान देखाजा रहा है और अनिवार्य उस पद पर पांच वर्ष काअनुभव। कंपनी का उच्च स्तरीय प्रबंधन मात्रअपने स्वार्थ के वशीभूत चालू प्रभार की रेवडिय़ांबांट रहा है तथा वर्ष 2012 से यह रेवड़ीलगातार बांटी जा रही है।
इन अधिकारियों के कार्यकाल मेंसर्वाधिक हुए अनियमितताएं: सबसे अधिकअनियमितताएं या नियमों का उलंघन तत्कालीन मुय महाप्रबंधक कप्तान सिंह एवं तत्कालीनप्रबंध निदेशक विवेक पोरवाल के कार्यकाल मेंकिया गया। यहां तक कि कप्तान सिंह के द्वारा लंबित दण्ड प्राप्तअधिकारियों के चालू प्रभार देने के लिए प्रस्तावभेजे गए लेकिन जिन अधिकारियों का कैरियरबेदाग था उनके प्रस्ताव नहीं बनाए गए।
यह हैं उदाहरण8 दिसंबर 2015 को मुय महाप्रबंधककार्यालय के पत्र क्रमांक-1131 के तहत चालूप्रभार का प्रस्ताव भेजा गया जिसमें भोपाल क्षेत्रके सहायक यंत्री वीरेन्द्र तिवारी को चालू प्रभार
देने की अनुशंसा की गई थी। इसी प्रकार पत्रक्रमांक- 659 दिनांक- 13 अगस्त 2015 केतहत भोपाल क्षेत्र के हरदा में पदस्थ सहायकयंत्री राजीव रंजन को चालू प्रभार के लिएप्रस्तावित कर दिया गया। सतेन्द्र चौहान, पीसीनरवरे, एनके छीपा, अवधेश त्रिपाठी एवंराजकुमार मालवीय को पांच वर्ष से पूर्व ही चालूप्रभार दे दिया गया है।
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