ग्वालियर
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक से संबद्ध 76 साख सहकारी समितियों पर हुए गबन में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। ऋण माफी की सूची में उन किसानों के भी नाम आ गए हैं, जिन्होंने अपना पूरा ऋण चुकता कर समिति से नो ड्यूज ले लिया था। ऋणमाफी की सूची में नाम आने के बाद किसान अचंभित हैं। किसान ऋण चुकता करने की रसीदें लेकर बैंक की शाखाओं पर पहुंच रहे हैं। किसानों ने कहा कि ऋण का पैसा जमा कर चुके हैं तो माफी की सूची में नाम कैसे आ गया। सचिवों ने नए तरीके से गबन को अंजाम दिया है।
जिले की 76 साख सहकारी समितियों पर प्रबंधकों ने बड़े घोटाले को अंजाम दिया है। वर्ष 2006 के बाद से घोटाला होना शुरू हो गया था। वर्ष 2010 में बैंक के तत्कालीन कर्मचारी पं. सतीश शर्मा ने घोटाले का खुलासा किया था, लेकिन घोटाला करने वाले कर्मचारियों का भाजपा नेताओं से संबंध होने से कोई कार्रवाई नहीं की। फर्जी ऋण वितण कर बड़े घोटाले को अंजाम दे दिया। कांग्रेस सरकार की ओर से किसान ऋणमाफी घोषित होने के बाद नए खुलासे हो रहे हैं। ऐसे किसानों नाम ऋण बांटना दिखाया है, जिन्होने समिति पर ऋण लेने गए ही नहीं। अब उन किसानों के नाम पर भी घोटाला कर दिया, जिन्होंने ऋण लिया, लेकिन अपना ऋण चुकता कर दिया। ऋण माफी की सूची में नाम आने के बाद उन्हें पता चला कि उनके नाम फिर से ऋण निकाल लिया गया है। साख सहकारी समिति घरसौंदी, मेहगांव समिति ऐसे मामले सामने आए हैं। किसानों ने समिति पर ऋण का पैसा जमा कर दिया था। बावजूद इसके वह कर्जदार हैं। ऋण चुकाने वाले किसानों के पैसों में भी प्रबंधकों ने गबन कर दिया।
लाल फार्म पर कराएं आपत्ति
-फर्जी ऋण वितरण की राशि माफ न हो जाए, उसको लेकर बैंक की शाखा पर लाल फार्म रखा है। उस फार्म पर किसान की आपत्ति ले रहे हैं। किसान इस आपत्ति देता है तो उस वितरण की जांच कराई जाएगी।
– बैंक कंप्यूटराइज्ड नहीं होने की वजह से प्रबंधकों ने इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया है। जो पैसा किसान जमा करते थे, उसे भी बैंक तक नहीं पहुंचने देते थे। यही वजह है कि जो लोग ऋण चुकता कर चुके हैं, उनके नाम भी माफी में आ गए।
– ऋण प्रक्रिया का कोई पालन नहीं हुआ। फर्जी ऋण वितरण के लिए समिति है कागजी कार्रवाई कर देते थे।
फैक्ट फाइल
– साख सहकारी समिति-76
– ऋणमाफी वाले किसान- 37273
-एनपीए- 1 अरब 78 करोड़ 35 लाख
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