ग्वालियर
कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया (कैट) द्वारा भोपाल मेंआयोजित एक दो दिवसीय राष्ट्रीय व्यापारी सम्मेलन केदूसरे दिन देश के 24 राज्यों के व्यापारी नेताओं नेदेश के राजनीतिक पटल पर वोट बैंक की महत्ता कोदेखते हुए देश भर के व्यापारियों को एक वोट बैंक केरूप में तब्दील करने का ऐलान किया।
सम्मेलन में देशभर के 200 प्रमुख व्यापारी नेताओं ने भाग लिया।


इसमुद्दे को लेकर आगामी 1 फरवरी से कैट एक देश-एकव्यापारी -एक वोट के स्लोगन से एक राष्ट्रीय अभियानदेश भर में छेड़ा जाएगा। कैट के राष्ट्रीय सचिव भूपेन्दजैन ने राष्ट्रीय व्यापारी सम्मेलन में दिए अपने जोशीले व
तार्किक उद्बोधन में कहा कि देश भर में लगभग 7 करोड़व्यापारी हैं जो लगभग 45 करोड़ लोगों को रोजगार देताहै और देश में प्रतिवर्ष लगभग 42 लाख करोड़ रुपए काव्यापार करते हैं कृषि के बाद देश में रीटेल व्यापार ही
रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है। न केवलआर्थिक सेक्टर बल्कि सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्र में भीव्यापारियों की अग्रणी भूमिका है। कैट के राष्ट्रीय सचिवश्री जैन ने कहा कि एक लम्बे समय से ये देखा गया है
कि देश में वोट बैंक राजनीति का बोल बाला है औरउन्हीं की बात सुनी जाती है। देश के आर्थिक विकास मेंव्यापारियों के महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद भी किसीभी सरकार अथवा राजनीतिक दल ने व्यापारियों को
कभी भी अपनी प्रमुखता पर नहीं रखा। राजनीतिकपरिदृश्य में व्यापारियों को सदा नकारा गया है। लोकसभाके आगामी चुनावों के संदर्भ में व्यापारियों की महत्वपूर्णभूमिका को सुनिश्चित करने के लिए और व्यापारियों कोवोट बैंक के रूप में तब्दील करने का वक्त आ गया है
और इसके लिए देश भर के व्यापारियों को एक देश-एकव्यापारी-एक वोट के नारे के साथ एकजुट कर आगामी1 फरवरी से एक राष्ट्रीय अभियान छेड़ा जाएगा।लोकसभा चुनाव में अब देश भर के व्यापारियों के लिए
एक महत्वपूर्ण मौका है जब व्यापारी अपनी भूमिका कोराजनीतिक दलों के सामने मजबूती एवं स्पष्ट रूप से रखसकते हैं।
राष्ट्रीय सम्मेलन में कैट के राष्ट्रीय सचिव भूपेन्द्र जैनने कहा कि वर्तमान में व्यापारी जीएसटी के सरलीकरण,रीटेल व्यापार एवं ई-कामर्स में एफडीआई, व्यापारियोंको आसान शर्तों पर कर्ज मिलना, व्यापारियों पर दशकोंपुराने कानूनों का लागू होना, सरकारी विभागों द्वाराव्यापारियों का शोषण एवं भ्रष्टाचार सहित अनेक राष्ट्रीयएवं राज्यस्तरीय ट्रेड पॉलिसी का न होना आदि समस्याएंहैं जिनसे व्यापारी आए दिन जूझता रहता है। इसकोदेखते हुए व्यापारी अब राष्ट्रीय स्तर पर गोलबंद होंगेऔर आने वाले चुनावों में एक वोट बैंक के रूप मेंमतदान करेंगे।
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