
सिकंदरपुर। स्वामी विवेकानंद दरिद्रता को सबसे बड़ा अभिशाप मानते थे दरिद्रता के विरुद्ध युवा पीढ़ी को उठो जागो और जगाओ का मंत्र दिया। आज हम उस महान पुरुष का जयंती समारोह मना रहे है। उक्त उदगार जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति योगेंद्र सिंह का है उन्होंने डाक बंगला सिकंदरपुर में शनिवार को आयोजित स्वामी विवेकानंद जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा। बताया कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण का सबसे बड़ा दायित्व उस देश के युवाओं पर होता है अनुशासित एवं संस्कारित समाज ही देश को समृद्ध एवं उत्थान में सहभागी हो सकता है सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री राजधारी ने विवेकानंद के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिकागो की धर्म सभा के अपने संबोधन में उन्होंने हिंदुत्व को सब धर्मों के जनक के रूप में प्रस्तुत किया जिसकी शिक्षा है एक दूसरे को समझो और स्वीकारो। उन्होंने धर्माचार्यो से अपील की कि सभी धर्म पताको पर अंकित होना चाहिए कि लड़ो नहीं साथ दो खंडन नहीं संगम समन्वय एवं शांति विवेकानंद ने महसूस किया कि हमारा देश संप्रदायिकता एवं विरोधी मतवादों के कारण पंरतंत्र हुआ है इसलिए देश के अंदर राष्ट्रीय चेतना जागरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दरिद्र नारायण की सेवा का संदेश देते हुए बताया कि जब पड़ोसी भूखा मरता हो तो मंदिर में भोग चढ़ाना पूण्य नहीं पाप है। जिला प्रचारक रसड़ा राजीव नयन ने बताया कि विवेकानंद ने हिंदुत्व एवं बेदान्त की शिक्षा से दुनिया को प्रभावित किया तथा हिंदू धर्म के प्रति फैली हीन भावना की भ्रांति को दूर किया। एवं हिंदू धर्म की श्रेष्ठता को कायम किया। युवाओं को चरित्रवान बलिष्ठ एवं परिश्रमी बनने का संदेश देकर उन्होंने सुषुप्त भारत के अंदर राष्ट्रीय जागरण की चेतना का शंखनाद किया। डॉ विद्यासागर उपाध्याय ने विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता बताते हुए युवाओं से अपील किया कि एक-एक पल राष्ट्र निर्माण में समर्पित कर दो। समारोह को मुख्य रूप से मोहन कांत राय भूवाल सिंह अरविंद कुमार राय दिनेश सिंह सुरेश सिंह गिरजेश मिश्र मारकंडे शर्मा दयाशंकर भारती विमलेश उर्फ मुन्ना राय राकेश गुप्त संजय सिंह अविनाश राय आदि ने संबोधित किया। सभा का संचालन जिला पंचायत सदस्य भोला सिंह व अध्यक्षता परमेश्वर प्रजापति ने किया।
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