ग्वालियर- घड़ियालों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को भी दो घड़ियालों ने दम तोड़ दिया। इससे पहले पांच घड़ियालों की मौत हो चुकी है। इस तरह मृत घड़ियालों की संख्या सात पर पहुंच गई है।
घड़ियालों की मौत का कारण जानने के लिए सीसीएफ हरीशंकर मोहंता व जबलपुर के वाइल्ड एक्सपर्ट डॉ. एबी श्रीवास्तव (रिटायर्ड) मुरैना पहुंचे। एक्सपर्ट टीम ने मृत घड़ियालों का पोस्टमार्टम करने के बाद उनके शरीर के अंगों को फोरेंसिक लैब सागर भेजने के लिए सुरक्षित किया है। बीते पांच दिनों में कोई भी एक्सपर्ट इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है कि घड़ियालों की मौत की असली वजह क्या है। अभी तक घड़ियालों की मौत की वजह सर्दी बताई जा रही है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि उचित देखरेख व पूलों का पानी नियमित नहीं बदलने की वजह से इंफेक्शन के चलते घड़ियाल के बच्चे मर रहे हैं।
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉ. एबी श्रीवास्तव नेदेवरी ईको सेंटर पहुंचकर गुरुवार-शुक्रवार की रात मृत घड़ियालों का पोस्टमार्टम करने के बाद उनके शरीर के ह्रदय, फेंफड़े , किडनी, सिर आदि हिस्सों को अलग-अलग हिस्सों में प्रिजर्व कर उसे फोरेंसिक लैब सागर में जांच कराने का निर्णय लिया है। हालांकि एक्सपर्ट अभी तक घड़ियालों की मौत की वजह सर्दी को ही मान रहे हैं, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि घड़ियाल संक्रमण के कारण मर रहे हैं। गुरुवार-शुक्रवार को घड़ियालों की मौत के नए आंकड़े सामने आने के बाद अफसरों ने 237 घड़ियालों को चंबल में छोड़ने के निर्णय को अचानक रोक दिया। पोस्टमार्टम के दौरान ग्वालियर चिड़ियाघर के वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉ. रूपेंद्र यादव, उपसंचालक पशु चिकित्सा डॉ. सुरेश शर्मा, डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. उमेश शर्मा व डॉ. लोकेश गोयल की टीम भी वहां मौजूद रही। लेकिन इनमें से एक भी पशु चिकित्सक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बारे में कुछ भी नहीं बताया।
पूलों का पानी बदलिए गर्मी के लिए हीटर लगाएं : सीसीएफ हरीशंकर मोहंता भी मुरैना पहुंचे तो उन्होंने एहतियात के तौर पर वनमंडलाधिकारी को निर्देश दिए कि वे ईको सेंटर में बने पूलों का पानी प्रतिदिन बदलवाएं। पर्याप्त गर्मी मिले इसके लिए पूलों के आसपास हीटर लगाए जाएं। खाने के लिए ताजी मछली दें।
कितने घड़ियाल बीमार इसका आंकड़ा नहीं : देवरी ईको घड़ियाल सेंटर में फिलहाल कोई वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट नहीं है इसलिए सोमवार से लेकर शुक्रवार तक यह तय नहीं हो सका है कि पूलों में पाले जा रहे 237 घड़ियालों में से और कितने घड़ियाल गंभीर बीमार हैं। उनकी उछल-कूद व गतिविधियों पर नजर रखें।
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