ग्वालियर। नगर निगम की विभिन्न योजनाओंमें हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिए भोपाल से आईकमेटी खाना पूर्ति कर वापस लौट गई है। कमेटीके सदस्यों ने शुक्रवार एवं शनिवार को निगअधिकारियों के साथ बैठक की और विभिन्नयोजनाओं के दस्तावेज मांगे। कमेटी में शामिलनगरीय आवास एवं विकास विभाग के अपरआयुक्त शुक्रवार रात को ही निकल गए थे,जबकि बाकी बचे अधिकारी शनिवार दोपहरमंगला एसप्रेस से भोपाल रवाना हो गए। न तोकिसी अधिकारी ने चल रहे निर्माण कार्यों कीगुणवाा देखी और न ही अन्य जांच की। कमेटीदस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करेगी।अधिकारियों की माने तो कमेटी निर्माण कार्यदेखनें दोबारा आ सकती है।
सरकार बदलते ही नगरीय विकास एवंआवास विभाग के प्रमुख सचिव विवेक अग्रवालको हटाकर प्रमोद अग्रवाल को बनाया गया था।
नए प्रमुख सचिव ने ग्वालियर, रीवा एवंछिंदबाड़ा नगर निगमों में पिछले चार में हुए कार्योंकी जांच के आदेश दिए थे। इसके लिएअधिकारियों की टीम भी गठित की गई।
ग्वालियरके लिए गठित जांच टीम गुरूवार रात 2 बजेग्वालियर पहुंची और शुकवार को निगमअधिकारियों के साथ बैठकर जांच शुरू की। टीममें जांच अधिकारी के रूप में नगरीय विकास एवंआवास विभाग के अपर आयुक्त विकास मिश्राशामिल थे। इनके द्वारा अमृत योजना, स्मार्टसिटी, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्ययोजनाओं से जुड़े दस्तावेज मांगे गए। सुबह से
शाम तक चली जांच में विभिन्न दस्तावेजउपलध भी करा दिए गए। इसके बाद अपरआयुक्त भोपाल के लिए रवाना हो गए। जबकि
अन्य सदस्य अधीक्षण यंत्री सुरेश सेजकल एवंकनिष्ठ लेखाधिकारी प्रमोद नायकदस्तावेज लेकर भोपाल रवाना हो गए। जांच टीम
से साथ बैठक करने के लिए निगमायुक्त विनोदशर्मा ने अपर आयुक्त आरके श्रीवास्तव एवंसपािकर अधिकारी जगदीश अरोरा सहित अन्य
अधिकारियों की ड्यूटी लगाई थी।अन्य मदों में तो खर्च नहीं किया पैसा
नगर निगम से जुड़े सूत्रों की माने तो जांच टीम सिर्फयह देखने आई थी कि योजनाओं का बजट अन्यकार्य में तो नहीं खर्च किया गया। भोपाल में पदस्थअधिकारियों का यह सूचना मिली थी कि अमृतयोजना एवं स्माट सिटी के लिए जारी किए गए बजटको अन्य कार्यों में खर्च कर दिया गया है। इसकीजांच के लिए ही टीम बनाई गई थी।
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