ग्वालियर-
तानसेन समारोह में देशीविदेशी कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध कर दिया। सुबह की सभा की शुरुआत तानसेन संगीतमहाविद्यालय ने ध्रुपद से की।
झील में उठती लहरों की भांति अठखेलियां करतीं वायलिन से निकली मीठी-मीठी धुनें,बुलंद और सुरीली आवाज में घरानेदार गायकी। भारतीय राग-रागनियों के साथ समागम करती पर्सियनक्लासिकलम्यूजिक (ईरान) की धुनों पर रसिक डूबते उतराने नजर आए। राग जौनपुरी और चौताल में निबद्ध तानसेन रचित बंदिश के बोल थे नाद सुघर पुर
बसायो। पंडित कैलाश पवार ने गायन की शुरुआत तानसेन के जमाने के राग विलास खानी तोड़ी से की। बेहतरीनअलापचारी एवं बुलंद आवाज से उन्होंने श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। ध्रुपद भोला शिव शंकर का गायन किया तोरसिक शिव भक्ति में ओत-प्रोत हो गए।
वायलिन से उठीं सुरीली लहरें
मिश्री से भी मीठे राग बसंत मुखार में जब पं संतोष नाहर ने वायलिनवादन किया तो मीठे-मीठे सुरों से भरीं सुरीली लहरें हिलोरें लेने लगीं।
राग बसंत मुखारी दिन के रागों में बडा ही मीठा परंतु कठिन राग है।इस राग में पूर्वांग में राग भैरव और उारांग में राग भैरवी का समन्वय
है। इसलिये इसे गाने के लिए बहुत रियाज की आवश्यकता होती है।उन्होंने विलंबित रचना तीन और द्रुत तीन ताल में प्रस्तुत कर रसिकों
का मन जीत लिया।


प्रसिद्ध भजन पायोजी मैंने राम रतन धन पायो कीधुन निकाली तो संपूर्ण प्रांगण भक्तिमय हो गया। इसी के साथ उन्होंने
अपने वादन को विराम दिया। उनके साथ विख्यात तबला वादक सलीम
अल्लाह वाले ने नफासत भरी संगत की।सैयां निकस गए मैं ना लड़ी थी…शास्त्रीय संगीत की प्रतिभाशाली एवं समर्पित गायिका मधुमिता नकवी नेजब राग शुद्ध सारंग में ताल एक ताल विलंबित में बड़ा याल पिया नहींआए…. खनकदार आवाज़ में गाया तो रसिकों में प्रेम व विरह वेदनाहिलोरें लेने लगी। उन्होंने तीन ताल में छोटा याल कैसे घर जाऊं… कासुमधुर गायन किया।
इसके बाद एक ताल में तराना पेश किया।
मधुमिता नकवी शास्त्रीय गायकी के साथ-साथ शास्त्रीय नृत्य में भीपारंगत है। इसलिए उनकी गायकी में नृत्य व गायन दोनों अंग का प्रभाव
साफ समझ आ रहा था। उनके साथ हारमोनियम पर उस्ताद जमीलहुसैन खां, सारंगी पर उस्ताद सिराज हुसैन और तबले पर रामेन्द्र सिंहसोलंकी की संगत कमाल की रही।
पर्सियन संगीत के समोहन में बंधे रसिकरंग विरंगे परिधानों में सजे-धजे पर्सियन (ईरानी) कलाकारों ने जब
अपने मुल्क के वाद्य यंत्रों से मधुर धुन निकाली तो वातावरण सतरंगीहो गया। उस पर ईरान की वियात गायिका सारंग सैफीजादे के मधुर
कंठ से निकल रही सुरीली तान ने रसिकों पर जादू सा असर किया।आज की प्रात:कालीन सभा के आखिर में विश्व संगीत के तहत ईरान
के महिला संगीत साधकों की प्रस्तुति हुई।इस प्रस्तुति में ईरानी संतूरपर सुश्री निगाह जोहदी, कामेश पर सुश्री नाजनीन गनीजादे और
टुबक पर सुश्री निलोफर मोहसनीन ने संगत की।तानसेन समारोह में आज
गौतम काले का गायन, सौरवव्रत चक्रवर्ती की सुर बहार, ज्योति फगरे अय्यरका गायन तथा उस्ताद निसार हुसैन खां एवं दयानेश्वर देशमुख की तबला -पखावज जुगलबंदी होगी। सभा की शुरुआत सारदा नाथ मंदिर संगीत
महाविद्यालय के ध्रुपद गायन से होगी।शाम की सभाविश्व संगीत के तहत जर्मनी के निल्गम असॉय, माल्टे स्टिवीक, जॉनेसकिस्टैन, बेन्जामिन स्टिवीक का गायन, फ्रेम ड्रम व ल्यूट की प्रस्तुति।
इसके बाद कशिश मिाल का गायन, उस्ताद निसार खां का सितार वादन,
अजय प्रसन्ना का बांसुरी वादन होगा। इस सभा का शुभारंभ ध्रुपद केंद्रग्वालियर करेगा ।
घट घट में पंछी बोलत
भारतीय संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने राग विहाग में तानसेन रचित रचना प्रस्तुत की, जो ताल चौताल में निबद्ध थी। बंदिश के बोल थे सकलगुन जाने सकल गुन माने। इस प्रस्तुति में पखावज पर संजय आफले और हारमोनियम पर जनाब आरिफ खान ने संगत की। तत्पश्चात आर्मीनिया से आए आर्सेनपेट्रोजियान ने अपने देश के वाद्य दुदुक और उनके साथी कलाकारों ने ताल वाद्य दहोल से मीठी मीठी धुनें निकाली। दुदुक वाद्य बहुत कुछ भारतीय बाँसुरी और दहोलभारतीय ढोलक की तरह बजाया जा रहा था। इसके बाद शॉक गैस्प्रियान और एविटिस केयोसियान ने संगत की। स्व. वीणा सहस्त्रबुद्धे की सुयोग्य शिष्या मोवना रामचंद्र
का गायन हुआ राग बागेश्री में पहले बड़ा याल एकताल में कोन गत भई प्रस्तुत किया इसके बाद अद्दा त्रिताल में आली री सघन लागी बंदिश प्रस्तुत की । बाद में द्रुततराना प्रस्तुत किया। समापन कबीर भजन घट घट में पंछी बोलत से किया तबला संगत अनिल मोघे व हारमोनियम संगत विवेक बनसोड ने की।
बजने से पहले ही टूट गया सितार क ा तार
तानसेन समारोह के अंतिम दिन शहर के सितार वादक प्रमोद वापट व उनकी पत्नी संध्या तिवारी वापट के नेतृत्व में सितार बैंड की प्रस्तुति होनी थी, लेकिन तानसेनसमारोह में प्रमोद का सितार बजने से ही पहले ही उनकी जिंदगी का तार टूट गया। वे पिछले तीन दिन से बीमार थे। ह्रदयगति रूकने से उनका निधन हो गया।
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