ग्वालियर। कमलनाथ मंत्रिमंडल में ग्वालियर जिले से तीन विधायकों इमरती देवी, लाखन सिंह यादव और प्रद्युम्न सिंह तोमर को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। भाजपा सरकार में भी जिले के तीन विधायक मंत्रिमंडल में शामिल थे। जिले में 6 सीटें हैं। पिछली बार भाजपा के पास चार और दो कांग्रेस के खाते में थीं। इस बार कांग्रेस ने 5 सीटों पर फतह पाई है।
कमलनाथ मंत्रिमंडल में जिले के तीन विधायकों के शामिल होने से जिले का रुतबा बरकरार रहा है। इमरती देवी का नाम तो पहले ही दिन से तय माना जा रहा था, लेकिन प्रद्युम्न सिंह तोमर और लाखन सिंह यादव को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया। तीनों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की खबर लगते ही समर्थकों ने आतिशबाजी की, ढोल नगाड़ों पर डांस कर मिठाई बांटी।
निशाने पर था महल
प्रद्युम्न सिंह तोमर को मंत्रीमंडल में शामिल किए जाने को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि प्रदेश चुनाव अभियान समिति के संयोजक व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके लिए अड़े थे। तोमर ने ग्वालियर विधानसभा सीट से उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया को हराया है। पवैया की राजनीति ज्यादातर समय महल (जयविलास पैलेस) को निशाना साधकर की जाती रही है।
विधानसभा चुनाव प्रचार में जिले की 6 में से सांसद सिंधिया ने केवल इसी विधानसभा में प्रद्युम्न के लिए रोड शो किया था। अन्य विधानसभाओं में केवल सभाएं ली थीं। रोड शो किए जाने के दौरान चर्ची फैली थी कि सांसद सिंधिया हर हाल में इस सीट को जीतना चाहते हैं। तोमर भी पूरी तरह सिंधिया समर्थक और पवैया विरोधी रहे हैं। वे पवैया का नाम लेने के बजाय मेकअप मंत्री कहकर ही संबोधित करते थे।
दूसरी बार जीते हैं तोमर
1 जनवरी 1968 को मुरैना जिले की अम्बाह तहसील के नावली गांव में जन्में प्रद्युम्न तोमर की कर्मभूमि ग्वालियर रही। न्यू कॉलोनी बिरलानगर निवासी तोमर ने ग्रेजुएशन की डिग्री पाई और छात्र राजनीति से सक्रियता बनाई। 1984 से राजनीति और जनांदोलनों में शामिल तोमर जनकल्याण संघर्ष समिति के संयोजक बने। फिर कोमी एकता कमेटी के संभागीय संयोजक बने। बाद में वे कांग्रेस से जुड़ गए और युवक कांग्रेस के सचिव, चार बार उपाध्यक्ष बने। फिर कांग्रेस के प्रदेश प्रतिनिधि बनाए गए। 2008 में कांग्रेस ने उन्हें इसी सीट पर टिकट दिया तो वे विजयी हुई। लेकिन पिछले चुनाव 2013 में भाजपा के जयभान सिंह पवैया ने उन्हें शिकस्त देकर सिंहासन छीन लिया।
हार के बाद तोमर शांत नहीं बैठे। बिजली, पानी, सड़क, सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं व अन्य समस्याओं को लेकर आंदोलन करते रहे। जिले में वे अकेले ऐसे कांग्रेस नेता रहे, जिन्होंने सबसे ज्यादा आंदोलन किए और जेल तक गए। इस चुनाव में उन्होंने पवैया को 21 हजार मतों से हराकर पिछली हार का हिसाब चुकता कर लिया।
लगातार तीसरी बार जीते लाखन
भितरवार विधानसभा सीट से कांग्रेस के लाखन सिंह यादव लगातार तीसरी बार जीते हैं। पहले यह सीट गिर्द नाम से जानी जाती थी। परिसीमन के बाद इसे भितरवार कहा जाने लगा। 90 के दशक में जिले में बसपा का जोर चरम पर था। किरार समाज के नेता लाखन सिंह ने अपनी राजनीति की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी से जुड़कर की।
बसपा ने 1998 में लाखन सिंह को टिकट दिया तो उन्होंने कांग्रेस-भाजपा दोनों ही प्रत्याशियों को पटखनी देकर विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ना सीख लिया, लेकिन अगले ही साल कांग्रेस का दामन थाम लिया। लाखन सिंह यादव को 2003 कांग्रेस ने टिकट दिया लेकिन वे यह सीट बचाने में कामयाब नहीं हो सके।
54 साल के लाखन सिंह यादव का मूल निवास हिम्मतगढ़ के पार गांव में है, लेकिन लंबे समय से वे लक्ष्मीगंज में रह रहे हैं। हार के बाद वे अपनी विधानसभा में ही सक्रिय रहे। शहर की राजनीति से उन्होंने कोई वास्ता नहीं रखा। इसका लाभ उन्हें 2008 के चुनाव में मिला। उन्होंने भाजपा के बृजेन्द्र तिवारी को पटखनी दी। 2013 के चुनाव में भाजपा ने यहां अनूप मिश्रा को तो टिकट दिया तो वे भी लाखन सिंह से यह सीट छीन नहीं सके।
10 साल विपक्ष की सीट पर बैठने वाले लाखन सिंह अपने क्षेत्र में ही डेरा जमाए रहे। यही कारण रहा कि इस बार त्रिकोणीय मुकाबले में उन्होंने अनूप मिश्रा को फिर 12 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित कर दिया।
loading...
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal