ग्वालियर -भिंडजिले का कलेक्टर अगर सरकारी अस्पताल की खिड़की पर अपनी बेटी के इलाज कराने के लिए लोगों के बीच कतार में खड़ा हो जाए तो देखने वाले हैरान हो जाएंगे। ऐसा ही वाकया हुआ, जब भिंड कलेक्टर धनराजू एस भिंड जिला अस्पताल पहुंचे और अपनी बेटी के इलाज के लिए पर्चा बनवाने के लिए कतार में लग गए। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मचारी उन्हें पहुचान भी नहीं पाए।
कर्मचारियों ने कलेक्टर इमरजेंसी खिड़की से सामान्य खिड़की में जाने को कहा
कलेक्टर धनराजू एस अपने सादगी पसंद अंदाज के लिए सुर्खियों में रहते हैं
भिंड कलेक्टर धनराजू एस अपने सादगी पसंद अंदाज के लिए जाने जाते हैं। शनिवार को वह अपनी सात साल की बेटी का इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंच गए। इसके बाद वह पर्ची कटाने के लिए इमरजेंसी खिड़की में खड़े हो गए तो स्वास्थ्य कर्मचारियों ने उन्हें सामान्य खिड़की में जाकर ओपीडी का पर्चा बनवाने के लिए भेज दिया।
असल में, कलेक्टर धनराजू एस इसके पहले सिवनी के कलेक्टर थे। इस दौरान भी वह अपनी बेटी को स्कूल लेने के लिए पैदल ही चले जाते थे। धनराजू एस 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें चुनावों के ठीक पहले आशीष कुमार गुप्ता की जगह भिंड का कलेक्टर बनाया गया था। दरअसल सत्तारूढ़ दल के समर्थन की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने उन्हें यहां से हटाया था और धनराजू एस को जिले की कमान सौंपी गई थी।
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