ग्वालियर-
जजेस एसोसिएशन ने शुक्रवार को अपनी याचिका को हाईकोर्ट से यह कहते हुए वापस ले लिया कि इसे चलाने में वे रुचि नहीं रखते हैं। साथ ही हर्जाने के 5 हजार रुपए भी लीगल एड में जमा कर दिए। एसोसिएशन ने 17 जुलाई 2018 को दिए उस आदेश में बदलाव की मांग की है, जिसमें कोर्ट ने 1990 से मार्च 18 मार्च 2016 तक अपर सत्र न्यायाधीश व नाजिर, नायब नाजिर, ट्रेजर की भूमिका की जांच के आदेश दिए थे।
रुचि अग्रवाल ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिका में तर्क दिया गया था कि सोडा कुआं में हुई डकैती में 80 लाख रुपए का सोना व चांदी बरामद हुआ था। साथ ही एक आरोपी भी पकड़ा गया था, लेकिन वह दोषमुक्त हो गया। इसके बाद जब्त माल को लेने के लिए जिला कोर्ट में एक आवेदन किया गया था। मालखाने से जब माल का बॉक्स मंगवाया तो उसमें से पूरा सामान गायब था। इसके बाद कोर्ट ने नाजिर हरि सिंह के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। पड़ाव पुलिस ने केस दर्ज कर लिया, लेकिन उसके बाद पुलिस ने मामले में कोई रुचि नहीं ली। मामला गंभीर है, पुलिस हाईकोर्ट में स्टेट्स रिपोर्ट भी पेश नहीं कर रही है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस मामले में सख्ती दिखाई और 17 जुलाई 2018 को पुलिस को आदेश दिया कि 26 साल से पदस्थ रहे नाजिर, नायब नाजिर, ट्रेजरर व ऑफिसर इंचार्ज के खिलाफ जांच की जाए।
हाईकोर्ट ने उन न्यायाधीशों के नाम भी मांगे थे, जो मालखाने के इंचार्ज रहे, कोर्ट में इनके नाम पेश किए गए। जो जज मालखाने के इन्चार्ज रहे, उनमें कुछ हाईकोर्ट जज भी हैं। इस आदेश के आने के बाद जजेस एसोसिएशन ने भी याचिका दायर कर दी और 17 जुलाई 2018 के आदेश में बदलाव की मांग की। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने एसोसिएशन को अपने बायलॉज (नियमों) की कॉपी पेश करने का आदेश दिया था, सुनवाई के दिन दो मौके भी दिए, लेकिन एसोसिएशन अपना बायलॉज पेश नहीं कर पाया। इसके बाद कोर्ट ने एसोसिएशन पर पांच हजार का हर्जाना लगा दिया था। साथ ही कोर्ट ने कहा था कि याचिका तभी सुनी जाएगी, जब एसोसिएशन पांच हजार रुपए जमा कर देगा। इसके बाद जजेस एसोसिएशन ने याचिका को वापस लेने के लिए आवेदन पेश किया। कोर्ट ने याचिका को वापस कर दिया। रुचि अग्रवाल की ओर से पैरवी आरके सोनी ने की।

1988 में हुई थी डकैती व हत्या
उपनगर ग्वालियर में सोडा कुआं के पास रमेशचन्द्र गोयल रहते थे। 16 मई 1988 को उनके घर में डकैती पड़ी थी। डकैतों ने सोना-चांदी व नकदी लूटने के बाद रमेशचन्द्र गोयल व बसंती गोयल की हत्या कर दी थी। इसके बाद एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया था। उससे करीब 80 लाख रुपए का माल भी बरामद किया। उस माल को कोषालय में जमा करा दिया गया। इसके बाद जिला न्यायाधीश ने एक जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की थी, जिसमें बताया गया था कि बॉक्स से 12 कीमती पैकेट गायब हैं।
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