कुलदीप सिंह (सन्नी)

बढ़ता कारवाँ / सींगरौली :- आज रेणुसागर गुरुद्वारे में बैसाखी का पर्व केंद्रीय रूप से बड़े ही धूमधाम से मनाया गया, वैशाखी के पर्व पर गुरुद्वारे को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया, बैसाखी का त्यौहार सिख समाज का प्रमुख त्यौहार होता है |
यह त्योहार मूल रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस त्योहार को मनाए जाने के पीछे धार्मिक व ऐतिहासिक दोनों मान्यताएं मौजूद हैं. इस त्योहार को सिख समुदाय के लोग नववर्ष के रूप में मनाते है

फसल उत्सव से जुड़ा है यह त्योहार
धार्मिक मान्यता कि मानें तो यह त्योहार फसल उत्सव से जुड़ा है. इसे रवि की फसल के पकने के मौके पर मनाया जाता है. इस दिन से खेतों में रवि फसल के पकने के बाद उनकी कटाई शुरू की जाती है. किसान अपने खेतों से रवि फसल की कटाई करके आते हैं और शाम के समय आग जलाकर उसके चारों ओर इकट्ठे होते हैं. मूल रूप से यह त्योहार खुशी का प्रतीक है ।

खालसा पंथ की हुई थी स्थापना
वहीं, इसके पीछे की ऐतिहासिक मान्यता की मानें तो इस दिन सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह ने 13 अप्रैल 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी. इस पंथ की स्थापना धर्म की रक्षा और समाज की भलाई से उद्देश्य से की गई थी.

साल का पहला दिन है बैसाखी
बैसाखी को अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इसे असम में बिहू, बंगाल में नबा वर्षा, केरल में पूरम विशु कहते हैं. बैसाखी को बैसाखी या मेष संक्रांति भी कहा जाता है. इस दिन सूर्य मेष राशि में करते हैं. बैसाखी को बंगाली कैलेंडर के अनुसार साल का पहला दिन भी माना जाता है. बंगाल में भी इस दिन को काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. बंगाली कैलेंडर में यह दिन काफी खास माना जाता है
लंगर का होता है आयोजन
इस दिन गुरुद्वारों को काफी अच्छे तरीके से सजाया जाता है और सिख समुदाय के लोग गुरुवाणी सुनते हैं. साथ ही सभीको मुफ्त भोजन देने के लिए भंडारा का भी आयोजन किया जाता है
बैशाखी पर्व के अवसर पर ऊर्जांचल के समस्त गुरुद्वारे में तैयारी चल रही थी । रेणुसागर गुरुद्वारे में 11 तारीख को अखण्ड पाठ साहिब का पाठ प्रारम्भ किया गया था । जिसकी समाप्ति आज सुबह गुरुद्वारा साहिब में कई गयी ।
आज बैशाखी पर्व के दिन रविवार को प्रात 10:00 बजे से स्थानीय रागी जत्था ने रेणुसागर में कीर्तन किया । बैसाखी के अवसर पर भाई हुकम सिंह जी वाराणसी आए ने सिख धर्म का व्यख्यान कर गुरुबानी कीर्तन किया । इसके बाद आनंद शाहिब के पाठ किया गया जिस की समाप्ति के बाद अरदास फिर गुरु का अटूट लंगर भी वितरित किया गया ।
ऊर्जांचल की संगत इस पर्व के उत्साह पूर्वक मनाते हुए सुबह से ही गुरुद्वारे में एकत्रित हो गई । पाठ की समाप्ति 2:30 बजे होने के उपरांत लंगर का प्रसाद वितरण किया गया । कई स्थानीय लोगों ने प्रसाद लिया।
रेणुसागर गुरुद्वारा में जयंत,बीना, बैढ़न, शक्तिनगर, सिंगरौली के गुरुद्वारे में भी सुबह कीर्तन दरबार किया गया । रेणुसागर गुरुद्वारा में मुख्य रूप से सेवा के लिए रेणुसागर परियोजना प्रमुख आर पी सिंह को गुरुद्वारा कमिटी ने सरोपा भेट कर सम्मान किया । इसके साथ ही स्थानीय गुरुद्वारा के जत्थेदारों तथा गुरुद्वारा की सेवा में लगे अन्य सभी लोगो को भी प्रबंध कमेटी ने सरोपा देकर सम्मानित किया । इस कार्यक्रम में अन्य गुरुद्वारा समिति के अध्यक्ष ,समिति सदस्य के साथ के साथ समस्त साध संगत ने कीतर्न वाणी सुनकर निहाल हुए ।
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