बढ़ता कारवाँ/सिंगरौली (जमुना सोनी) बैढन हर्रई आवास योजना एवं एमआइजी कॉलोनी नवजीवन बिहार निवासी – एसडी गर्ग बताते है कि जो मोहल्ले के हर्रई आवास योजना एवं एमआइजी कॉलोनी नवजीवन बिहार निवासी – एसडी गर्ग जो मोहल्ले के आरडब्ल्यूए नवजीवन रहवासी कल्याण समिति के सचिव भी हैं और कचरा प्रबंधन और उससे जैविक खेती का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है ।

जैसे- पेंट आदि के खाली डिब्बों को उपयोग कर उससे कंपोस्ट बिन बनाकर घर की रसोई से निकलने वाले कचरे सब्जी – फल आदि का छीलन बचे हुए खाने से जैविक खाद का निर्माण करते हैं और पेंट – डिस्टेंपर व खाली ड्रम जो कि टूट – फूट जाते हैं उन्हें गमले के रूप में इस्तेमाल कर मिट्टी भरकर घर की छत पर पैकिंग की बेकार हुई लकड़ियों की बेडिंग बनाकर सभी तरह की सब्जी उगाते हैं और यह गतिविधि उन्होंने पिछले 2 वर्षो से कर रहे है और सिर्फ स्वयं ही नहीं ताजी हरी जैविक सब्जियों का आनंद लेते हैं बल्कि अधिक उत्पादन होने पर मोहल्ले के रहवासी एवं मित्रों को भी बांटते हैं और उनके मुताबिक हर मौसम की सब्जियां जैसे भिंडी, लौकी, करेला, तोरई, नेनुआ, बरबटी, फूल और पत्ता गोभी, टमाटर, साग, खीरा, मिर्च एवं धनिया की पत्ती सतत रूप से उनके छत पर उगायी जा रही है ।

वही कोविड -19 लॉकडाउन के दौरान उन्हें कभी भी सब्जियों की कमी नहीं पड़ी और उनकी संस्था शारदा डेवलपमेंट एंड एनवायरमेंट कोआर्डिनेशन कमेटी पुरानी वस्तुओं को पुनर्चक्रित कर उपयोगी वस्तुएं भी निर्मित करती है जिसमें कंपोस्ट बिन भी एक उत्पाद के तौर पर है और सिंगरौली नगर पालिक निगम से लेकर अयोध्या नगर निगम तक इनके कंपोस्ट बिन खरीद चुके हैं ।
वही एसडी गर्ग का कहना है कि हमें कचरों से निजात पाने व जलवायु और मृदा को प्रदूषण से बचाने के लिये इस तरह की सतत जीवनशैली अपनानी होगी और तभी हम शुद्ध वातावरण में स्वस्थ रह सकेंगे और हमारा शहर और परिवेश स्वच्छ रहेगा और समाज के हर वर्ग के व्यक्ति और परिवारों को शहरी जीवन के दौरान इसे अपनाना बहुत ही लाभदायक है और साथ -साथ समाजहित में जरूरी है ।
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