ग्वालियर
हाईकोर्ट के नियमों का पालन न करने पर सील किए गए मैरिज गार्डनों के ताले ट्रेड लाइसेंस बनवाने पर गुरुवार से खुलना शुरू होंगे। बुधवार को कलेक्टोरेट में अफसरों के साथ मैरिज गार्डन संचालकों की हुई बैठक में तय हुआ कि अब तक की बुकिंग को देखते हुए इन गार्डनों की सील खोल दी जाएगी। लेकिन हर गार्डन संचालक को 10 हजार रुपए जमा करके ट्रेड लाइसेंस लेना होगा। ट्रेड लाइसेंस देने के लिए गुरुवार को सुबह 11 बजे से बाल भवन में नगर निगम द्वारा शिविर लगाया जाएगा। कलेक्टर अनुराग चौधरी ने कहा कि मैरिज गार्डन निर्धारित मापदंडों के अनुरूप दस हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में हो, जिसमें 40 प्रतिशत हिस्सा पार्किंग के लिए होना आवश्यक है। मैरिज गार्डन संचालकों को राजस्व विभाग का डायवर्सन शुल्क, नगरनिगम का संपत्ति एवं अन्य कर जमा करने के साथ दुर्घटनाओं को रोकने हेतु अग्निशमक यंत्रों, सीसीटीवी कैमरे आदि की व्यवस्था होना भी आवश्यक है। कलेक्टर ने इस दौरान नगर निवेश विभाग के अधिकारी को निर्देश दिए कि साडा क्षेत्र में मैरिज गार्डन विकसित करें। एसपी नवनीत भसीन ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश एवं छात्रों की वार्षिक परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए शादी समारोह में ध्वनि विस्तारक यंत्रों (डीजे) का उपयोग निर्धारित डेसीमल पर रात 10 बजे तक ही किया जाए। इसके बाद ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग करते पाए जाने पर संबंधित मैरिज गार्डन संचालक एवं विवाह व समारोह आयोजनकर्ताओं के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन ने बताया कि प्रत्येक मैरिज गार्डन संचालक को , मैरिज गार्डन का पंजीयन कराने के साथ-साथ 10 हजार रूपए का ट्रेड लाईसेंस लेना होगा। इसके साथ ही संपत्ति एवं अन्य कर भी जमा करने होंगे। उन्होने बताया कि मैरिज गार्डन को ईको कम्पनी से संपर्क कर यूजर चार्ज जमा कर शादी समारोह पश्चात बचे कचरे को हटाने का कार्य करा सकते हैं। श्री माकिन ने बताया 9 जनवरी को प्रात: 11 बजे से बाल भवन ग्वालियर मे शिविर का आयोजन किया गया है। इस शिविर में मैरिज गार्डन संचालक ट्रेड लाईसेंस फीस, बकाया डायवर्सन फीस, संपत्ति कर आदि राशि जमा कर सकेंगे।
सिटी मैग्नेट सिटी की जमीन पर तैयार होंगे सरकारी गार्डन
एंटी माफिया अभियान के तहत भू-माफियाओं के चंगुल से छुड़ाई गई सरकारी जमीनाें पर मैरिज गार्डन तैयार किए जाएंगे। कलेक्टर अनुराग चौधरी ने ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन जमीनों पर मैरिज गार्डन तैयार करें और उनसे मिलने वाले किराए में से आधी राशि खुद प्राधिकरण ले व आधी राशि जिला प्रशासन के पास जमा कराए। साथ ही काउंटर मैग्नेट सिटी की जो जगह शहरी क्षेत्रों से सटी हुई हैं उन पर भी मैरिज गार्डन तैयार करें।
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