ग्वालियर श्योपुर जिले के कराहल क्षेत्र में सिखकिसानों के साथ कलेक्टर प्रतिभा पाल को गुमराह कर जिन अधिकारियों
ने खेतों में फसल तथा बने मकानों को तोडऩे का कृत्य किया था उस परआक्रोशित किसानों की मांग पर प्रदेश शासन मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा नरेंद्र सिंह सलूजा के
नेतृत्व में एक जांच समिति बनाई गई। जांच समिति में सरदार गुरुशरणसिंह भी शामिल थे। समिति की रिपोर्ट के बाद मुयमंत्री ने कराहल मेंपदस्थ एसडीएम, तहसीलदार व पटवारी को हटाने का आदेश संबंधितअधिकारियो को दिए जिस पर कार्यवाही करते हुए तीनों को कराहल सेहटा दिया गया है।
कराहल क्षेत्र में सिख समाज के किसानों को माफिया बताकर उनकेखेत में खड़ी फसल व मकानों को तोड़ दिया गया था। इस कार्यवाही केबाद से सिख समाज में खासा आक्रोश व्याप्त हो गया था। मामले की गूंजजब प्रदेश की राजधानी में पहुंची तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तत्काल
जांच समिति बनाकर मामले की तहकीकात करने के लिए कराहल भेजा।जांच समिति में प्रदेश कांग्रेस की मीडिया कॉडिर्नेटर नरेन्द्र सलूजा की
अगुवाई में समिति बनी जिसमें ग्वालियर के सरदार गुरुशरण सिंहअहलूवालिया भी शामिल थे। समिति ने कराहल जाकर घटनास्थल परपीडि़तों से संपर्क कर हकीकत की जानकारी ली ओर श्योपुर के कलेक्टर से भी चर्चा की थी। इसके साथ ही जांच समिति ने कराहल क्षेत्र के अन्य
लोगों से भी हकीकत के बारे में जानकारी लेकर भोपाल में पहुंचकरअपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास भेज दी साथ ही उसे राजस्व विभाग के
प्रमुख सचिव को दी। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिवराजस्व मनीष रस्तोगी ने कराहल मामले में शामिल सभी राजस्व
अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने की कार्यवाही कर दी।
यहां बतादे कि डबरा शिवपुरी में भी विवादित रहे थे रुपेश उपाध्याय
तीन मुस्लिम महिलाओ की आत्महत्या केलए जिम्मेदार रहे हे करीब 300मकान भाजपा नेता के कहने पर बिना किसी आदेश के चुनचुनकर तुड़वाये थे
जिसमे पत्रकार ,कांग्रेस नेता, स्कुल प्राचार्य और आम लोग प्रताड़ित हुए थे जाँच कार्यवाही हो
हटाए गए एसडीएम अपनी सेवा काल से ही विवादित रहे हैं तथापिछले कई वर्षों से पूर्व में कई पदों पर इसी तहसील तथा जिले में तैनातरहे है।
वहीं पटवारी राजकुमार शर्मा विगत 15 साल से इसी क्षेत्र मेंकिसानों को आतंकित कर रहा था। जांच समिति की रिपोर्ट पर मुयमंत्री
कमलनाथ ने इनको तत्काल हटाने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव मोहंती नेबताया थे लिखित शिकायतों की जांच के बाद अगर उपरोक्त अधिकारी
दोषी पाए जाते हैं तो इनके विरुद्ध और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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