ग्वालियर
बिजली कंपनी के सिटी सर्किल में पदस्थ एक डिप्टी जनरल मैनेजर (डीजीएम करंट चार्ज) बिजली कंपनी के कर्मचारियों की सहकारी सोसायटी से ढाई लाख रुपए का लोन लेकर फरार हो गए। डीजीएम सतेंद्र सिंह चौहान ने इस सोसायटी से वर्ष 2017 में दो किश्तों में ढाई लाख रुपए का लोन लिया था, लेकिन इसकी अदायगी शुरू नहीं की। इसके चलते कोर्ट में पहुंचे केस में उन्हें फरार घोषित कर गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया है, लेकिन श्री चौहान अब भी ठप्पे से रोशनीघर स्थित कार्यालय में नौकरी कर रहे हैं।
10 दिसंबर को कोर्ट ने श्री सतेंद्र सिंह चौहानचौहान के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। इस हिसाब से लगभग एक माह पूरा होने को है। इसके बावजूद पुलिस ने वारंट की तामीली कर श्री चौहान को गिरफ्तार नहीं किया है। दूसरी तरफ वे लगातार कार्यालय में ड्यूटी कर रहे हैं। गत शुक्रवार को उन्होंने अवकाश लिया था और शनिवार को सरकारी टूर पर भोपाल गए थे।
तीन साल से नहीं चुकाई किश्तें तो कोर्ट ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट
आफिस में कर रहे हैं नौकरी, पुलिस नहीं कर रही अरेस्ट
दोनों मामलों की समीक्षा करता हूं
 आपने जो मामले बताए हैं, मैं अफसरों से उनकी पूरी जानकारी मंगाता हूं। हम इन दोनों मामलों की समीक्षा कर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ ठोस एक्शन लेंगे। प्रियव्रत सिंह, ऊर्जा मंत्री मप्र
चुकता कर दूंगा लोन की राशि
 गिरफ्तारी वारंट के संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। जहां तक लोन की बात है, तो मैंने सोसायटी से लोन लिया था और किश्तें दी थीं। बाद में ट्रांसफर होने के कारण मेरे वेतन से किश्तें कटना बंद हो गईं। अब मैं लोन की राशि चुकता कर दूंगा। सतेंद्र सिंह चौहान, डीजीएम सिटी सर्किल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी
इधर…12 लाख रुपए का गबन करने वाले को सजा के बजाए दिया सीआरएस
ग्वालियर
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सेटिंगबाज अफसरों ने 12 लाख रुपए से अधिक राशि के गबन के आरोपी की बर्खास्तगी के स्थान पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति (सीआरएस)दे दी। वर्ष 2015-16 में ग्रामीण क्षेत्र में कार्यालय सहायक श्रेणी तीन के पद पर पदस्थ इकबाल हुसैन कुरैशी ने कलेक्शन सेंटरों से आने वाले पैसे को कंपनी के खाते में जमा नहीं कराया, लेकिन इसकी पंचिंग ऑनलाइन लगातार करते रहे। मामले का खुलासा होने पर श्री कुरैशी पर एफआईआर दर्ज कराकर सस्पेंड किया गया, लेकिन बाद में राजनीतिक दखल के चलते सेटिंगबाजी का खेल चला और उन्हें टर्मिनेट करने के बजाय अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर पूरे फंड का भुगतान कर दिया गया।
विधायक और सीजीएम शामिल
इस पूरे मामले को सेट कराने के लिए ग्वालियर के एक विधायक और भोपाल मुख्यालय में पदस्थ एक चीफ जनरल मैनेजर की भूमिका भी शामिल रही। विधायक ने ग्वालियर के अफसरों को सेट कर टर्मिनेशन का प्रस्ताव रुकवाया और कंपनी के मुख्यालय में बैठी सीजीएम ने वहां के अफसरों को सेटल करा दिया।
मेरे खिलाफ साजिश रची गई थी
 मेरे खिलाफ तो मामला ही झूठा बनाया गया था। जिन दस्तावेजों की फोटोकॉपी दिखाकर मुझे आरोपी बनाया गया है, उसके मूल दस्तावेज कंपनी के पास हैं ही नहीं। मैंने इस मामले की अपील की थी और हाईकोर्ट में भी इस निर्णय के खिलाफ केस लगाया है। इकबाल हुसैन कुरैशी, अनिवार्य सेवानिवृत्त कर्मचारी
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