तानसेन समारोह पं. विद्याधर व्यास,सम्मान यह मेरा नहीं, मुझमें विद्यमान एक संगीत साधक और ग्वालियर घराने का सम्मान है,
ग्वालियर- आज मुझे तानसेन अलंकरण के रूप में जो सम्मान प्राप्त हुआ है, वह इस परंपरा का ही गौरव है। इसके लिए मैं तो केवल निमित्त मात्र हूं, एक साधक हूं। यह मेरे अंदर विद्यमान साधक का सम्मान है। यह बात ग्वालियर घराने के प्रख्यात गायक पं. विद्याधर व्यास ने तानसेन अलंकरण मिलने के पश्चात कही। इससे पहले समारोह में मुख्य अतिथि प्रदेश की संस्कृति, चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ ने पं.विद्याधर व्यास को वर्ष 2019 का तानसेन अलंकरण प्रदान किया।
मेरे गुरु और पिताजी पं. नारायण राव व्यास ने मुझे ग्वालियर घराने के शास्त्रीय संगीत की तालीम दी। उन्हें यह तालीम उनके गुरु पं. विष्णु दिगम्बर पलुस्कर ने दी। तब से इस घराने की संगीत विरासत गुरु-शिष्य परंपरा के रूप में चल रही है और इस माध्यम से ही यह मुझ तक पहुंची।
राजा मानसिंह तोमर राष्ट्रीय सम्मान कर्नाटक के निनासम हेग्गोडु से के. वेंकटेश और टी. नारायण को प्रदान किया गया। प्रशस्ति पत्र वाचन संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव पंकज राग ने किया। इस अवसर पर संभागायुक्त एमबी ओझा, कलेक्टर अनुराग चौधरी, एसपी नवनीत भसीन और नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन मौजूद रहे।
तानसेन समारोह में
तानसेन की समाधि स्थल पर प्रस्तुतियों की शुरुआत हो गई है। यहां पर ध्रुपद की प्रस्तुतियां हो गईं। सभा की शुरुआत म्यूजिक यूनिवर्सिटी के गायन से हुई। इसके बाद ग्वालियर घराने की मीता पंडित का गायन, इंदौर के रसिका गावड़े का गायन, भोपाल की श्रुति अधिकारी एवं समूह का पंचनाद, कोलकाता के सागर का ध्रुपद गायन और ग्रीस के कलाकारों की प्रस्तुति होगी।
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