ग्वालियर-
मंदी की मार से इन दिनों ट्रक व अन्य लोडिंग वाहन चालक भी जूझ रहे हैं। अंचल के कई कारखानों ने इन दिनों या तो शटडाउन कर दिया है या फिर प्रोडक्शन में 20 से 80 फीसदी की कमी कर दी है। वहीं कई इंड्रस्टीज ऐसी भी हैं जिनका प्रोडक्शन अधिक हो गया और अब माल की खपत नहीं हो पा रही। ऐसे में कारखानों पर निर्भर सैंकड़ों ट्रक संचालकों के बैंकों की लोन किस्तों को भर पाना भी मुश्किल हो रहा है। क्योंकि कारखानों से उन्हें भाड़ा नहीं मिल पा रहा है।
मंदी के इस दौर से खुद को बचाने के लिए ट्रांसपोर्ट यूनियन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख समस्याएं गिना रहे हैं।
लोकल ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष राजीव मोदी ने बताया कि 22 अगस्त को पीएम मोदी के नाम पत्र लिखा। जिसमें मंदी के कारण ट्रकों के संचालन में आ रही समस्याओं का जिक्र था।
ये गिनाएं समस्याएं

-कॉमर्शियल पर लगने वाले देश व प्रदेश के करों को कम किया जाए।
-फायनेंस हुए वाहनों पर बैंक व एनबीएफसी से 2-3 किश्तों की राहत दी जाए।
-थर्ड पार्टी बीमे पर लगने वाले जीएसटी को हटाया जाए।
-पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लिया जाए। ताकि सभी प्रदेशों में समाज रेट हों।
-कॉमर्शिलय वाहन एवं टायरों लग्जरी गुड्स से अलग किया जाए। जीएसटी 28प्रतिशत से कम हो।
-कॉमर्शियल वाहनों की उम्र 15 वर्ष तय की जाए।
-टोल टैक्स मुक्त कर टोल परमिट लागू किया जाए।
-कॉमर्शियल वाहनों का 20% से 25% एक्सल लोड बढ़ाया गया है। जिसके कारण टायर घिसाई, डीजल एवरेज, वाहन रिपेरिंग खर्च खासा बढ़ गया है। एक्सल लोड वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए।
इज्जत बचाने कर रहे ट्रकों को सरेंडर
ट्रांसपोर्टरों की हाल इन दिनों खासी खराब है। कोई भी नए ट्रक खरीदने की स्थिति में नहीं है। कारखानों ने कच्चा माल मंगाना बंद कर दिया है। कई फैक्ट्रियों ने शटडाउन कर दिया है, कई के माल की खपत नहीं हो पा रही। भाड़ा नहीं मिल पाने के कारण 70 फीसदी ट्रक मालिकों को किस्तें भर पाना भी मुश्किल हो रहा है। रिकरी के लिए ट्रकों को खींच कर न ले जाएं, इसलिए इज्जत बचाने खुद ही ट्रकों को सरेंडर कर रहे हैं। बीते 3 महीने से हालात सबसे ज्यादा खराब हैं।
राजीव मोदी, अध्यक्ष, लोकल ट्रांसपोर्ट यूनियन ग्वालियर
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