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बिजली अधिकारियों ने नियम मिलीभगत सेविरुद्ध बेचे स्क्रैप मेटेरियल एल्युमिनियम लोहे के पोल

ग्वालियर
 
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा ग्वालियर से झांसी तक हाईवे का निर्माण कराया जा रहा है। इस निर्माण कार्य के तहत दतिया शहर में हाईवे चौड़ीकरण के लिए 33 केवी, 11 केवी, एलटी लाइन और ट्रांसफॉर्मर के डीटीआर स्ट्रक्चर शिफ्ट किए गए हैं। इस शिफ्टिंग के लिए एनएचएआई ने 31 दिसंबर 2018 को बिजली कंपनी के अफसरों को पत्र लिखा था।
 
कंपनी ने लाइन शिफ्टिंग के बाद निकले सामान को एरिया स्टोर में जमा कराने की शर्त के साथ परमिशन जारी कर दी। इसके बाद एनएचएआई ने वर्तमान में इस रोड का निर्माण करा रही गावर कंस्ट्रक्शन कंपनी को लाइन शिफ्टिंग कराने के लिए कहा। इस कंपनी ने चिरुला से गोराघाट के बीच में गोराघाट पुल, सोनागिर पुल, केंद्रीय विद्यालय नंबर एक, भारत कॉलेज और कृषक सेवा केंद्र, चिरुला चौकी, न्यू कलेक्टोरेट दतिया, राजघाट कॉलोनी, गुरुनानक कॉलोनी जैसी जगहों पर लाइन शिफ्टिंग का काम किया। इस दौरान यहां से 4709 किलो एल्युमिनियम के वायर और 39493 किलो लोहे के पोल व अन्य स्क्रैप निकला। नियम के मुताबिक इस सामान को एरिया स्टोर में जमा कराया जाना था, लेकिन दतिया के एई एसटीसी सत्यम सिंह ने सिटी एई अभिषेक मिश्रा को ठेकेदार फर्म द्वारा स्क्रैप की रकम जमा कराने का पत्र लिखा और सेम डे ही श्री मिश्रा ने मात्र 163367 रुपए जमा कराकर यह माल ठिकाने लगवा दिया।
 
बिजली कंपनी के नियम के मुताबिक ऐसे किसी भी स्क्रैप मेटेरियल को पहले एरिया स्टोर में जमा कराया जाता है। स्टोर में अमला यह देखता है कि इस मेटेरियल का दोबारा उपयोग किया जा सकता है या नहीं। उदाहरण के तौर पर रोड किनारे लगाए गए बिजली के पोल 13 मीटर तक लंबे होते हैं। ये दो मीटर तक जमीन में गाढ़े जाते हैं। कंपनी मानकर चलती है कि शिफ्टिंग के दौरान पोल काटने पर उन्हें 11 मीटर का हिस्सा मिल जाएगा, जिसे ग्रामीण या शहरी क्षेत्र में इस्तेमाल कर लिया जाता है। अगर पोल और छोटा हो गया है, तो वेल्डिंग से उसमें अतिरिक्त टुकड़ा जोड़कर उपयोग किया जाता है। यदि कोई सामान बिल्कुल भी उपयोग के लायक नहीं है, तो उसकी नीलामी की जाती है, जिसमें ज्यादा बोली लगाने वाले ग्राहक को यह सामान बेच दिया जाता है।
 
अफसरों ने एल्युमिनियम स्क्रैप का रेट मात्र 9.41 रुपए प्रति किलोग्राम लगाया है।
 
नहीं बेच सकते मेटेरियल
 
विशेष गढ़पाले, एमडी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी
 
नहीं, बिजली कंपनी में किसी भी स्तर के अफसर को इसके पावर नहीं हैं। सामान की बिक्री के लिए बाकायदा कमेटी बनाकर निस्तारण किया जाता है।
 
उसे सबसे पहले एरिया स्टोर में जमा कराने का नियम है। मैंने इसके निर्देश भी दे रखे हैं।
 
इस तरह से मेटेरियल नहीं बेचा जा सकता है। मैं तुरंत ही अफसरों से इस मामले की जानकारी लेता हूं। हम इस संबंध में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
 
अफसरों द्वारा बेचे गए लौहे का दाम दर्शाती एस्टीमेट डिटेल रिपोर्ट।
 
कबाड़ से कम लगाई कीमत
 
बिजली कंपनी ने जो डिस्मेंटल सामान का रिटर्न एस्टीमेट बनाया है, उसमें 3779.14 किलो एल्युमिनियम स्क्रैप का रेट मात्र 9.41 रुपए प्रति किलो और केबल व वायर के रूप में मौजूद 930 किलो एल्युमिनियम का रेट 13 रुपए प्रति किलो के हिसाब से लगाया गया है, जबकि यह कबाड़ में भी 100 रुपए किलो के हिसाब से बिकता है और नए एल्युमिनियम की कीमत 130 रुपए किलो से अधिक है। इसी प्रकार 39493 किलो लोहे के पोल मात्र 2.93 रुपए किलो के हिसाब से बेचा गया है, जबकि कबाड़ में भी यह धातु कम से कम 40 रुपए किलो के हिसाब से बिकती।
 
मैंने पैसे जमा नहीं कराए
 
स्क्रैप मेटेरियल से संबंधित सारी कार्रवाई एसटीसी के माध्यम से होती है। मैंने किसी से कोई पैसे जमा नहीं कराए हैं। मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। (इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया।) अभिषेक मिश्रा, एई दतिया सिटी
 
एमडी के आदेश का बहाना
 
गत एक माह में हुई कई बैठकों में बिजली कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विशेष गढ़पाले ने अफसरों को निर्देश दिए थे कि फील्ड में कंपनी का बहुत सारा सामान कबाड़ की तरह पड़ा हुआ है। इसे तुरंत ही एरिया स्टोरों में जमा कराया जाना चाहिए। इस आदेश के बहाने इन दोनों इंजीनियरों ने एक ही दिन में एक-दूसरे के साथ पत्राचार कर सामान को ठिकाने लगवा दिया।
 
सामान पूरा नहीं दे पा रहे थे
 
लाइन शिफ्टिंग के बाद में ठेकेदार फर्म हमें सामान पूरा नहीं दे पा रही थी। इस कारण उन्होंने कहा था कि वे पैसा जमा कराने को तैयार हैं। मैंने इस संबंध में सिटी एई को पत्र लिखा था। अब उन्होंने क्या किया, ये वही बता सकते हैं। सत्यम सिंह, एई एसटीसी दतिया
 
एसई एसटीसी द्वारा अपने ही समकक्ष दूसरे अिधकारी को राशि जमा करने के लिए लिखा गया पत्र। दोनों की मिलीभगत से ये काम हुआ।
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