ग्वालियर-
मप्र में 1100 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाला(आईटीसी) सामने आने के बाद अब ग्वालियर में भी ऐसा घपला सामने आया है। 6 बोगस फर्में पिछले 6 माह से कारोबार कर रहीं थी और 250 करोड़ का कारोबार कर शासन को 20 करोड़ों रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी कर तगड़ी चपत लगा दी। जीएसटी (गुडस एंड सर्विसेस टैक्स) राज्यकर के सर्विलांस पर यह फर्में तब आईं जब ई-वे बिल जनरेशन का विश्लेषण किया जा रहा था। सबसे ज्यादा ई-वे बिल जनरेशन में यह फर्में आगे दिखीं तो रडार पर आईं। इन फर्मों को बिना किसी आपत्ति के जीएसटी पंजीयन मिल गया और इन्होंने ताबड़तोड़ कागजी कारोबार कर टैक्स चोरी का खेल शुरू कर दिया। ग्वालियर के रचना नगर और नया बाजार सहित विभिन्न पतों पर यह फर्में रजिस्टर्ड होना पाईं गईं हैं, जिनकी पड़ताल चल रही है।

ऐसे सामने आया करोड़ों का घपला
ई-वे बिल जनरेशन के लिए डाटा एनालिसिस का काम चल रहा था। इसी दौरान जीएसटी राज्यकर के अधिकारियों ने देखा कि पिछले 6 माह में ग्वालियर स्थित 6 फर्मों ने 250 करोड़ के करीब का कारोबार कर डाला है। कारोबार रेडीमेड का हुआ है, जिसमें ई-वे बिल जनरेशन की संख्या भी अच्छी खासी थी। इन ई-वे बिल के जरिए जब टीम ने जांच शुरू की तो इनके जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए लगाए जाने वाले किराएनामे की जांच हुई। आधी फर्मों के मालिकों ने एक माह के लिए ही किराए का ठिकाना लिया और गायब हो गए। जबकि शेष फर्मों में किराएनामा में लिखे पते ही फर्जी निकले।
ऐसे किया फर्जी कारोबार
ग्वालियर के पतों पर फर्म बनाकर जीएसटी का ऑनलाइन रस्ट्रिेशन कराया। विभाग का नियम है कि नए रजिस्ट्रेशन के लिए एक कॉपी स्टेट जीएसटी और एक सेंट्रल जीएसटी के पास जाती है। अगर तीन दिन तक कहीं से कोई आपत्ति नहीं आती तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन ऑटो जनरेट हो जाता है। इन फर्मों ने ई-वे बिल जनरेट कर माल की खरीद-ब्रिक्री दिखाई जरूर, लेकिन कहीं कोई माल नहीं गया। माल की जगह सिर्फ टैक्स क्रेडिट बिकता रहा और शासन को टैक्स की चपत लगी।
20 करोड़ तक टैक्स चोरी का आकलन
ग्वालियर आधारित खुद को बताने वालीं इन छह बोगस फर्मों ने करीब 20 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी की है। 6 माह में लंबा-चौड़ा हिसाब-किताब रखने वाली यह फर्में लगातार फर्जीवाड़ा करती रहीं और विभाग को खबर नहीं लगी। अब इन सभी फर्मों के कर्ता-धर्ताओं को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई मास्टरमाइंड सामने नहीं आया।
अब सर्विलांस पर ऐसी फर्में
इस नए इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले के मामले में जीएसटी राज्य कर कमिश्नर डीपी आहूजा और स्पेशल कमिश्नर अविनाश लवानिया के निर्देशन में एंटी ऐवेजन के डिप्टी कमिश्नर यूएस बैस की टीमें काम कर रहीं हैं। यहां ऐसी फर्मों को ट्रैक करने के लिए ग्राउंड लेवल पर टीमें उतारी गईं हैं।
इंदौर से खुला था ऐसा ही खेल
ऐसा ही घोटाला हाल ही में इंदौर व प्रदेशभर में सामने आया था, जिसमें बोगस फर्में बनाकर 1100 करोड़ का स्क्रैप का कारोबार दिखाया गया था। मामले में कड़ी से कड़ी जुड़ती गई और प्रदेश के बाहर और अंदर तक अलग-अलग चेहरे सामने आए थे।
मामला पकड़ में आया है
ग्वालियर की 6 बोगस फर्मों की ओर से पिछले कुछ समय में 250 करोड़ का करीब कारोबार दिखाकर टैक्स चोरी की गई है। जीएसटी राज्यकर कमिश्नर के निर्देश पर हमारी टीमें जांच कर रहीं हैं।
यूएस बैस, डिप्टी कमिश्नर (एंटी ऐवेजन) जीएसटी राज्यकर
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