ग्वालियर-
डबरा के अंतर्गत आने वाले बिलौआ-रफादपुर में स्वीकृत 23 काली गिटटी के क्रेशरों को कलेक्टर न्यायालय ने सस्पेंड कर उत्खनन और परिवहन पर रोक लगा दी है। अब कलेक्टर के आगामी आदेश तक यहां कोई गतिविधि नहीं की जा सकेगी। दो साल से 425 करोड़ के अवैध उत्खनन के यह मामले चल रहे थे जिनमें शासकीय और निजी भूमि पर भारी मात्रा में उत्खनन पाया गया है।इन प्रकरणों में बार बार तारीखें आगे बढ़ जातीं थीं जिस कारण निराकरण नहीं हो पाया था।

कलेक्टर न्यायालय की गुरूवार की सुनवाई में दो साल से लंबित चल रहे इन काले पत्थरों के क्रेशरों के 23 मामलों में कलेक्टर अनुराग चौधरी ने सुनवाई की। कलेक्टर ने पाया कि किस तरह दो साल से यह प्रकरण जानबूझकर होल्ड पर रखे जा रहे थे। गुरूवार को प्रकरणों की कलेक्टर ने विस्तृत सुनवाई की और यह पाया कि क्रेशरों पर संबंधित ठेकेदारों द्वारा लगातार निजी व सरकारी भूमि पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है। प्रकरणों को अनावश्यक विलंब में रखा गया जिससे अभियोजन की कार्रवाई में बाधा उत्पन्न हुई। इसके साथ ही कलेक्टर ने इन प्रकरणों में रूचि न लिए जाने पर तत्कालीन माइनिंग ऑफिसर मनीष पालेवार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने पर माइनिंग अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।

आगे बढ़ते गए केस,होता रहा अवैध उत्खनन
बिलौआ और रफादपुर क्षेत्र में काली गिटटी का उत्खनन होता रहा और केस कलेक्टर न्यायायल में चलते रहे। दो साल से यह सिलसिला चल रहा था और अधिकारियों को तारीख बढ़ाने के खेल का पता ही नहीं चला। यहां यह भी शंका है कि इसमें माइनिंग विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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