ग्वालियर- पुलिस जवानों शराब माफियाओं, और दलालों के बीच लेनदेन का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। अवैध शराब के कारोबार पर अकुंश लगाने का जिम्मा आबकारी विभाग का है, लेकिन पुलिस भी अवैध धंधे से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती। चुनावी बेला में शराब तस्कर आबकारी व पुलिस के टारगेट पर हैं। पुलिस ने पिछले छह महीने में कई बार अवैध शराब और फुटकर विक्रेताओं को पकड़ा है, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर पुलिस के कदम उन गोदामों तक पहुंचने से क्यों ठिठक जाते हैं, जहां से यह सप्लाई होती है। इस कारोबार के आड़े आने पर विनय उर्फ मनिया की शराब तस्कर महेश गुप्ता ने 20 लाख की सुपारी देकर हत्या करा दी थी। इस मामले में शराब माफियों से बड़े पुलिस अफसरों के संबंध भी उजागर हुए थे।
पहला प्रकरण
करीब छह माह पहले नयागांव से क्राइम ब्रांच की टीम ने बंद पड़ी फैक्ट्री से 905 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की, जिसकी कीमत 63 लाख रुपए बताई गई थी। यह शराब नया गांव कहां से पहुंची, इसका पता लगाना पुलिस ने जरूरी नहीं समझा। जबकि पड़ताल में पता लगाना चाहिये था कि किस गोदाम से आई और इसे संग्रहित करने वाले कौन सफेदपोश लोग हैं। अगर पुलिस की जांच आगे बढ़ती तो शराब माफिया बेनकाब होते।
दूसरा प्रकरण
झांसी रोड थाना पुलिस ने विक्की फैक्ट्री के पास छह माह पूर्व एफआरबी से शराब बरामद की। पुलिस ने वाहन के पायलट गिर्राज पुत्र देवेंद्र राणा को पकड़ा था। आशंका थी कि बरामद शराब अवैध थी, लेकिन गिर्राज का कहना था कि शराब उसने रिश्तेदार में आयोजित शादी समारोह में स्वागत-सत्कार के लिए खरीदी थी। इस मामले में भी पुलिस की कार्रवाई सिर्फ आरोपित से पूछताछ और एफआरबी की जांच तक ही सिमित रह गई।
पुलिस और माफियाओं के गठजोड़ में हुई मनिया की हत्या
महलगांव कर्मचारी आवास कॉलोनी निवासी विनय उर्फ मनिया राठौर का जला हुआ शव उसकी कार टोल टैक्स के पास मिला था। पड़ताल में उजागर हुआ कि शराब के ठेके पर नौकरी कर महेश गुप्ता ने इस कारोबार के गुर सीखे और प्रदेश का सबसे बड़ा माफिया बन गया। मनिया भी पहले महेश से जुड़ा था, बाद में उसके धंधे में आड़े आने लगा। महेश ने 20 लाख की सुपारी देकर मनिया की हत्या कर दी। हत्या के मामले में पकड़े जाने के डर से महेश ने विदेश भागने का प्रयास किया, पर पुलिस ने पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी ने डीआईजी रैंक के अधिकारी से सेटिंग कर जांच कराई और खुद को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया। मामला न्यायालय के संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने जांच रिपोर्ट केश डायरी के साथ संलग्न नहीं की, जिस कारण फिलहाल वह जमानत पर है। इससे साफ है कि पुलिस-नेताओं व माफियाओं में गहरा गठजोड़ है।
अधिकारियों ने चुप्पी साधी
पुलिस अधिकारी अवैध शराब से जुड़े मामलों में आधिकारिक रूप से कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। उनका सिर्फ इतना कहना है जो ऑडियो वायरल हुए हैं, उनकी जांच की जा रही है। कब कितनी शराब पकड़ी, उसकी जांच कहां तक पहुंची, यह तो केश डायरी देखकर ही कुछ कहा जा सकता है। इस मामले में अधिकारी खुलकर बात करने के बजाये चुप्पी साधे हुए हैं।
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