ग्वालियर-
विपक्ष में15 साल से रहकर बिजली, पानी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर आंदोलन करने वाले कांग्रेसी अब सत्ता में आते ही आक्रामक अंदाज में हैं। ऐसे दो नजारे देखने को मिले।

कांग्रेस के ग्वालियर क्षेत्र से नवनिर्वाचित विधायक प्रद्युम्न सिंह तोमर सुबह सिविल अस्पताल हजीरा पहुंचे तो इसके बाद पूर्व विधानसभा क्षेत्र से नवनिर्वाचित विधायक मुन्नाालाल गोयल दोपहर में जिला अस्पताल मुरार में जा खड़े हुए। उन्होंने अधिकारियों की बैठक लेकर अपने अंदाज में कह दिया कि सरकार बदल गई है इसलिए अधिकारियों को भी अब मानसिकता बदल लेनी चाहिए। उन्हें मरीजों का दर्द समझना होगा। पूरे स्टाफ को ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाना होगी। मनमानी या लापरवाही करने वाले टिक नहीं पाएंगे। रहा सवाल संसाधनों का तो प्रस्ताव बनाकर दें, सरकार से उन्हें मंजूर कराने का प्रयास किया जाएगा। चूंकि दोनों ही विधायकों ने इन मुद्दों को लेकर कई बार आंदोलन किए हैं, इसलिए वे हर कमी से अच्छी तरह परिचित हैं। ऐसी स्थिति में स्टाफ कोई बहाने नहीं बना सकता। एक ही दिन में दोनों विधायकों के तेवर देख स्वास्थ्य अधिकारी व स्टाफ भी सकते में आ गए।
सिविल अस्पताल में जल्द होंगे ऑपरेशन
सिविल अस्पताल हजीरा में जल्द ऑपरेशन थियेटर चालू होगा। इससे मरीजों को जेएएच और निजी अस्पताल नहीं जाना होगा। विधायक प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सुबह सिविल अस्पताल में जाकर बैठक ली और मरीजों को दवाएं तथा ऑपरेटर थियेटर जल्द चालू करने के निर्देश दिए। विधायक ने कहा कि दूसरी जगह अटैच डॉक्टर व अन्य स्टाफ को तत्काल वापस बुलाया जाए। रोगी कल्याण समिति की बैठक लेते हुए उन्होंने कहा कि दानदाताओं की सूची चस्पा की जाना चाहिए। मरीजों के परिजन से अच्छा बर्ताव किया जाए। बैठक में संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. एके दीक्षित, सिविल सर्जन डॉ. वीके गुप्ता सहित अन्य डॉक्टर मौजूद थे।
स्टाफ कम और संसाधन भी नहीं, इसलिए करते हैं रेफर
दोपहर में जिला अस्पताल पहुंचे विधायक मुन्नाालाल गोयल ने अस्पताल के बाहर खड़े होकर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उनके साथ मौजूद कांग्रेसियों व मरीजों के परिजन ने कहा कि डॉक्टर समय पर नहीं आते। बहाने बनाकर मरीजों को जेएएच रेफर कर देते हैं, डॉक्टर अक्सर गायब रहते हैं। रात में तो गंभीर मरीजों का उपचार करने कोई मौजूद ही नहीं होता। मशीनें खराब हैं। सिविल सर्जन डॉ. वीके गुप्ता ने कहा कि संसाधनों व स्टाफ की कमी है, कई प्रस्ताव लंबित हैं। यदि सरकार से उन्हें मंजूरी मिल जाती है तो मरीजों की सुविधा बढ़ सकती है। विधायक गोयल जिला अस्पताल की समस्याओं से अच्छी तरह वाकिफ हैं। इसलिए स्टाफ की बैठक लेते हुए उन्होंने कहा कि कहां, क्या जरूरत है, इसे वे जानते हैं। अभी इसी स्थिति में ईमानदारी से काम किया जाएगा। कौन-कौन से प्रस्ताव अटके हैं और कौन-कौन से नए बनाए जा सकते हैं, यह तैयारी कर लें।
इन कार्यों के प्रस्ताव अटके
बिल्डिंग के प्रथम तल पर ए,बी,सी,डी चार ब्लॉक तथा 10 प्राइवेट वार्डों का निर्माण, ट्रॉमा सेंटर के लिए नई डिजिटल एक्सरे मशीन, 10 बेड का पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड, सेन्ट्रल ऑक्सीजन सिस्टम की स्थापना, अस्पताल को वातानुकूलित करने के लिए 25 एयरकंडीशनर खरीदने और नर्सिंग स्टाफ के 33 खाली पद भरने जैसे प्रस्ताव लंबे समय से अटके हैं।
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