
BK-NEWS:- सिंगरौली। यह कैसी मजबूरी है कि सिंगरौली की सड़कों पर हर दिन मौत बिछी रहती है? बड़े-बड़े ट्रकों और तेज रफ्तार वाहनों के बीच इंसान और मवेशी दोनों कुचले जा रहे हैं। सड़कों पर हर मोड़ पर लहूलुहान हादसों की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की आंखें अभी भी बंद हैं।
गायें, जो कभी ‘गौमाता’ कहलाती थीं, आज सड़कों पर तड़प-तड़पकर मर रही हैं। इंसान, जो वोट देकर जनप्रतिनिधियों को सत्ता में बैठाते हैं, वही सड़कों पर दम तोड़ रहे हैं। सवाल उठता है – आखिर कब जागेगा प्रशासन? कब उठेगी जनप्रतिनिधियों की नींद।
क्या ये शिलशिला रुकेगा या इंतजार करना होगा अपनी अपनी बारी का।
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