करौटी सरपंच प्रत्याशी ने लगाया मतगणना में गड़बड़ी का आरोप
पराजित प्रत्याशी दारूद खान ने की पुन: मतगणना कराने की मांग, नोटा में पड़े मत हुआ शून्य
बढ़ता कारवाँ/सिंगरौली (राजकुमार सिंह – जमुना सोनी) बैढन त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मतगणना का सारणीकरण पूरा करने के बाद आज गुरुवार 14 जुलाई को पंच, सरपंच व जनपद पंचायत सदस्य पदों पर निर्वाचित प्रत्याशियों की घोषणा की गयी और वही जबकि जिला पंचायत सदस्यों के सारणीकरण के बाद निर्वाचित प्रत्याशियों की घोषणा 14 जुलाई को गयी और इस बीच सारणीकरण तथा मतो की गणना को लेकर प्रत्याशियों द्वारा गड़बड़ी के भी आरोप लगाये जा रहे हैं और ग्राम पंचायत क्षेत्र करौटी में हुये सरपंच पद के चुनाव में मेघनाथ वैश्य को विजयी घोषित किया गया है जिसमें अजय वैश्य को 246, बृजेन्द्र साकेत को 176, चन्द्रशेखर को 130, दारूद खान को 856, मेघनाथ को 964 जबकि नोटा को 0 मत प्राप्त हुये हैं और वही करौटी सरपंच पद के कुल 2650 मत पड़े जिसमें से 239 मत रिजेक्ट हो गये ।

वही पराजित सरपंच पद के प्रत्याशी दारूद खान का कहना है की 25 जून को मतगणना के पश्चात मतगणना पावती में नोटा को वोट 22 दिया गया एवं पोलिंग क्रमांक 137 में पीठासीन अधिकारी के द्वारा डाले गये मतगणना पर्ची में 83 वोट दिये गये एवं उसी पोलिंग क्रमांक 137 में एक और मतगणना पर्ची प्राप्त हुयी जिसमें अभ्यर्थी को 08 वोट की पावती दी गयी है जो संदेह पैदा करती है और उन्होने कहा कि आज 14 जुलाई को घोषणा अधिकारी के द्वारा पोलिंग क्रमांक 135 का मतगणना पर्ची में दर्शायी गयी नोटा 22 वोट का उल्लेख नहीं किया गया है और सरपंच पद प्रत्याशी दरूद खान ने इस संबंध में आज 14 जुलाई को जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी और एसडीएम सिंगरौली को एक शिकायती पत्र सौंपते हुये पुन: मतगणना कराये जाने की मांग की है ।
पुनः मतगणना नही हुआ तो करेंगे आमरण अनशन – दारुद खान
करौटी पंचायत में सरपंच पद के अभ्यर्थी दरूद खान ने कहा कि ग्राम पंचायत करौटी में हुयी मतगणना में बड़े पैमाने पर हेरफेरी की गयी है और इस संबंध में उन्होने 26 जून को कलेक्टर को आवेदन देने के साथ जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका भी लगायी थी जिसकी सुनवाई करते हुये हाईकोर्ट ने 12 जुलाई को इस मामले को एसडीएम के समक्ष ले जाने के लिये कहा और वही पराजित प्रत्याशी दरूद खान ने कहा कि मतगणना में हुयी हेरफेर की उचित जांच कर पुन: मतगणना नही हुयी तो वह आचार संहिता समाप्ति के पश्चात 18 जुलाई के बाद ग्रामीणों के साथ आमरण अनशन पर बैठेंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन – प्रशासन की होगी ।
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