बढ़ता कारवाँ/सिंगरौली (जमुना सोनी) बैढन जनपद पंचायत देवसर के ग्राम पंचायत उज्जैनी ग्राम पंचायत के निर्माण कार्यों में कार्यरत लगभग 190 मजदूरों की मजदूरी का भुगतान कई महीनों से नहीं हुआ है जिस कारण मजदूर भूखों मरने की कगार पर पहुंच गये हैं ।

वही आज रविवार दोपहर शाम को आल इंडिया यूथ फेडरेशन के जिलाध्यक्ष अरूण देव पाण्डेय ने माजन मोड स्थित कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया जिसमे पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये श्री पाण्डेय ने कहा कि ग्राम पंचायत उज्जैनी की सरपंच श्रीमती रवि कुमारी खैरवार ने 20/09/2019 को एक पत्र देकर जिला कलेक्टर से शिकायत किया था कि सरपंच के फर्जी दस्तखत करके गांव के दबंग व्यक्ति आसीम कुमार चन्देल रोजगार सहायक अभिमन्यु जायसवाल व सचिव अशोक गुप्ता की मिलीभगत से फर्जी सील लगाकर लगभग 80 लाख रूपये का आहरण कर लिया गया है और वही ग्राम पंचायत में हुये लगभग 80 लाख के भ्रष्टाचार का मामला जब उजागर हुआ तो इसके बाद कार्यवाही करते हुये जिला पंचायत सीईओ द्वारा सचिव के ऊपर रिकवरी के आदेश दिये गये और सचिव को निलम्बित कर दिया गया ।
पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये श्री पाण्डेय ने कहा कि उक्त भ्रष्टाचार के मामले में सचिव को निलम्बित तो कर दिया गया रिकवरी के भी आदेश दिये गये परन्तु ग्राम पंचायत के निर्माण कार्यों में कार्य करने वाले लगभग 190 मजदूरों की मजदूरी आज दिनांक तक नहीं मिली है और उन्होने कहा कि मजदूर दर – दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं और उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है ।
श्री पाण्डेय ने कहा कि इस संबंध में जिला कलेक्टर कार्यालय पर विगत 26 दिसम्बर को आमरण अनशन भी किया गया था जहां मात्र आश्वासन देकर धरना को समाप्त तो करा दिया गया परन्तु कई महीनों बीत जाने के बाद भी मजदूरों का भुगतान नहीं किया गया और इस संबंध में उन्होने कई बार आला अधिकारियों से बात की परन्तु वहां से भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुआ ।
वही एसडीएम देवसर, जिला पंचायत सीईओ, जनपद पंचायत सीईओ के द्वारा मात्र आश्वासन दिया जाता है परन्तु मजदूरों की समस्याओं का समाधान आज दिनांक तक नहीं किया गया और वही अगर मजदूरों का मजदूरी भुगतान 3 दिवस के अन्दर नहीं हुआ भुगतान तो धारा 144 के बावजूद भी आंदोलन करेंगे ।
सिंगरौली आल इंडिया यूथ फेडरेशन के जिलाध्यक्ष अरूण देव पाण्डेय ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये कहा कि बीते चार महीनों से लगभग 190 मजदूरों को मात्र आश्वासन पर आश्वासन मिल रहा है और वही धरना प्रदर्शन की अनुमति मांगने पर प्रशासन द्वारा कोरोना महामारी के कारण जिले में लगाये गये धारा 144 का हवाला दिया जाता है और उन्होने कहा कि यदि जिले में धारा 144 लगायी गयी है तो क्या मजदूर इस दौरान खाना नहीं खायेगा ? ऐसा कौन सा व्यक्ति है जो धारा 144 के कारण बाहर नहीं निकलता और उसे घर तक भोजन पहुंचता है और उन्होने कहा कि धारा 144 का बहाना बनाकर प्रशासन गरीबों की आवाज को दबाने का काम कर रहा है ।
वही यदि आने वाले 3 दिनों के अंदर लगभग 190 मजदूरों के मजदूरी लगभग 20 लाख रुपये बकाये राशि का भुगतान नहीं होता है तो मजदूरों और उसके परिजनो को लेकर एआईवाईएफ संगठन व मजदूरों के हित में कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन – प्रशासन की होगी ।
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