HS-NEWS (मध्य प्रदेश) सिंगरौली (राजकुमार सिंह/आरपी सोनी):- जिस जिले का विकास के नाम पर सरकार द्वारा उद्योगपतियों को भारी भरकम भूमि मुहैया कराई जा रही है जो प्राकृतिक पर्यावरण का विनाश कर प्रदूषण युक्त जिला बना मुनाफा कमा रहे है वहीं नदी पहाड़ वृक्ष से गाढ़ा प्रेम रखते हुये मुश्किल से अनाज पैदा कर जीवन यापन कहने वाले आदिवासीयों के लिए ढेर सारे नियम कायदा कानून और संवैधानिक अधिकार होने के बाद भी वन विभाग द्वारा भूमि अधिकार पत्र ना देते हुए उनके घरों को उजाड़ आए दिन आग लगाये जाते हुये अंग्रेजी नीत अपना उन्हीं के बीच आपस में विवाद पैदा कर दिया गया जो विवाद गंभीर बनता जा रहा है
जिले के चितरंगी खंड कर्थुआ परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कुड़ैनिया के भूमिहीन एवं हिस्सा-बाट में कम रकवा के भूमि-स्वामी आदिवासी गत कई वर्षों से गांव से लगा (चरहा डांड) जंगल की आराजी में घर बना आबाद हो जमीन जोत कर अपने परिवार का जीवन यापन करते हैं जिनके द्वारा वन अधिकार पट्टा प्राप्त करने हेतु आवेदन ब कायदे ऑनलाइन कराया गया था जिसे देख वन विभाग की टीम गत माह जंगल में पहुंच उनके घरों को उजाड़ आग के हवाले कर दिये। इतना ही नहीं गजब की बात तो यह है वन विभाग की टीम अंग्रेजी नीति अपनाते हुए गांव के संपन्न भूमि स्वामियों को सार्वजनिक निस्तार बाधा बताते हुए

उल्टा-सीधा समझा कर पालतू जानवरों को इकट्ठा करा बोये गये फसल चरा कर नष्ट करा दिया गया था जिस कार्यवाही से लगभग आधा सैकड़ा आदिवासियों को भोजन का संकट हो गया बताया जा रहा है कराए गए फसल
नुकसान की लिखित रिपोर्ट जिला कलेक्टर एसपी एवं पुलिस थाना चितरंगी मे किया गया पर आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई नतीजा पुनः फसल नष्ट करने की योजना बना रहे हैं और वहीं भूमि मे काबिज आदिवासी भूमि ना छोड़ते हुए पूरी तैयारी के साथ जान “देने-लेने “के मूड में है पीडितो का बयान सुन वन विभाग के साथ पुलिस की भी कार्यवाही विवादित कहना अनुचित नहीं होगा
ऐसे में खबर के माध्यम जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए नियम अनुसार शीघ्र उचित कार्यवाही कर विवाद मे संभावित हत्या रोकने की मांग की जाती है।।
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