बढ़ता कारवाँ/सिंगरौली (ब्यूरो कार्यालय) बैढन सिंगरौली जिले को चारागाह समझकर विभिन्न विभागों में कई वर्षों से पदस्थ अधिकारियों पर शिकायतों का कोई असर नहीं पड़ता है ।

कई विभागों में पड़े ऐसे बहुत से अधिकारी हैं जो बार-बार अपना स्थानांतरण करवाकर सिंगरौली धमक चुके हैं और अब रिटायर होने के करीब है कुछ ऐसे भी अधिकारी हैं जिनका कभी स्थानांतरण नहीं होता है और उनकी सेहत पर शिकायतों व समाचार पत्रों का भी कोई असर नहीं पड़ता है लेकिन यदि ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के ऊपर निराधार शिकायतों का आरोप लगा दिया जाये तो उसका मनोबल गिरता है एवं उसके कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है और ऐसा ही एक दृष्टांत इन दिनों सिंगरौली जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और व्यक्तिगत इंटरेस्ट लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक- प्रदीप शेन्डे पर निराधार शिकायतें करने की जोरदार चर्चा है।
बताते चलें कि श्री शेन्डे एक स्पष्टवादी बेवाक तथा मेहनती अधिकारी हैं और उनके ऊपर चौतरफा शिकायतों की बौछार इन दिनों की जा रही है ।
बताया जाता है कि एक पत्रकार संघ द्वारा उन पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होने शासन अल्ट्रा पावर के राख बंधे के टूटने के समय लॉ एण्ड आर्डर मेंटेन करते हुये महिलाओं से अभद्रता की गयी जबकि मौके पर मौजूद कई पत्रकारों ने हलफिया बयान दिया है कि ऐसी घटना घटित ही नहीं हुयी व जब श्री शेन्डे सीधी में पदस्थ थे उस समय भारत बंद के दौरान हुयी घटनाओं में भी उनपर निराधार आरोप लगाये जा रहे हैं ।
एएसपी का कहना है
इन आरोपों के बारे में श्री शेन्डे का कहना है कि उन्होंने उस दौरान कोई भी कार्यवाही स्वत: या निर्णय या मनमाने ढंग से नहीं की और सक्षम अधिकारी के निर्देश पर ही उपद्रवी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठी चार्ज एवं गैस के गोले दागे गये थे और श्री शेन्डे पर किसी पत्रकार से जानकारी लेते समय अभद्रता करने का भी कथित आरोप है। जबकि श्री शेन्डे ने बताया कि उक्त पत्रकार ने जानकारी मांगते समय उनसे अभद्रता की थी और अमुक समाचार को वायरल करने की धमकी भी दी थी और बहरहाल मामला जो भी हो वह जांच का विषय है किसी भी सक्षम अधिकारी के ऊपर कथित विद्वेष के चलते सरासर आरोप लगाना लाजिमी नहीं लगता है ।
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