ग्वालियर-
अस्पताल मेंकोराेना संक्रमित हाेने के बाद भर्ती कराए गए 34 लाेग अभी तक जान गंवा चुके हैं। जुलाई के मुकाबले में अगस्त में मौतों का प्रतिशत बढ़ रहा है। ऐसे लोगों को जान का खतरा ज्यादा है, जाे डायबिटीज, हृदय संबंधी बीमारी, टीबी, निमोनिया या अन्य किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। ऐसे मरीजाें काे यदि कोरोना का संक्रमण हो जाता है तो उनके फेंफड़े ठीक से काम नहीं करते।
इससे ब्लडप्रेशर और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसके चलते रेस्पिरेटरी फेलियर होने से मौत तक हो जाती है। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में आने वाले वे मरीज ठीक होकर घर जा रहे हैं, जिन्हें कोरोना के अलावा अन्य बीमारी नहीं है। रेस्पिरेटरी फेलियर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें खून में मौजूद ऑक्सीजन का स्तर अत्यधिक कम हो जाता है या फिर खून में कार्बनडाइऑक्साइड का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इस कारण कई बार शरीर के कई अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं।
इसे मल्टी ऑर्गन फेलियर कहा जाता है। इस स्थिति में रोगी की मृत्यु हो जाती है। यदि सांस लेने में किसी प्रकार की परेशानी हो रही हो या फिर दिल की धड़कन में बदलाव महसूस हो रहा है तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाएं। यह रेस्पेरेटरी फेलियर का लक्षण है। कोरोना से मरने वाले मरीजों की डेथ ऑडिट से भी इस बात का खुलासा हो रहा है कि जिन मरीजों की मौत कोरोना से हुई है उन्हें पहले से भी कई बीमारियां थीं। पढ़िए अभिषेक द्विवेदी की रिपाेर्ट…
काेराेना से जान गंवाने वालाें की डेथ ऑडिट रिपोर्ट…
टीबी, शुगर के साथ था संक्रमण
कंपू की माला श्रीवास (22) को डायबिटीज के साथ छाती और पेट की टीबी थी। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई थी। इस दाैरान वह कोरोना की चपेट में आ गईं तो उनका ब्लडप्रेशर कम हो गया। रेस्पिरेटरी फेलियर होने से मौत हो गई।
फेंफड़ों का निमोनिया था
काशीपुरा की रामप्यारी बाई (80) को बुखार, जुकाम और सांस लेने में परेशानी होने पर जेएएच में भर्ती कराया गया था। जांच में वे कोरोना पॉजिटिव निकलीं। उन्हें दोनों फेफड़ों का निमोनिया भी था। 28 जुलाई को उनकी मौत हो गई।
शुगर और निमोनिया था
बृज विहार नई सड़क की सुनंदा (25) को डायबिटीज और निमाेनिया था। जब उन्हें काेराेना हुअा ताे फेफड़े सहित कई अंग ठीक से काम नहीं कर रहे थे। पल्मोनरी टीबी के कारण शरीर में इंफेक्शन हो गया, जिससे वह कोमा में चली गईं और मौत हो गई।
शुगर व फेंफड़ों का निमोनिया था
सेवानगर के आरके पुनियानी (79) की मौत शुगर, वायलेटल यानी दोनों फेफड़ों का निमोनिया, एआरडीएस, धड़कन बढ़ने तथा हाइपरटेंशन से मल्टी आर्गन फेलियर की वजह से हुई। काेराेना की वजह से उनके अंगाें ने काम करना बंद कर दिया।
एचआईवी पीड़ित था युवक
सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कोरोना पॉजिटिव 38 वर्षीय मरीज एचआईवी से पीड़ित था। इससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम थी। कोरोना होने के बाद उसके शरीर के कई अंग काम करना बंद कर गए थे। मल्टी ऑर्गन फेलियर से उनकी मौत हुई।
इंफेक्शन के साथ था निमोनिया
चार शहर का नाका के मवासिया राठौर (80) को हाइपरटेंशन, वायलेटल निमोनिया, सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन और कोराेना का संक्रमण था। इस कारण वह कोमा में चले गए और मल्टी ऑर्गन फेलियर के चलते उनकी मौत हो गई।
क्या है रेस्पिरेटरी फेलियर
रेस्पिरेटरी फेलियर एक तरह की फेंफड़े की बीमारी है। यह बीमारी व्यक्ति को तब होती है जब उसके श्वास लेने की प्रक्रिया के दौरान भीतर छोटे-छोटे झिल्लियों में द्रव भर जाता है। ऐसा होने पर फेंफड़े रक्त में ऑक्सीजन नहीं दे पाते है। इसके कारण पूरे शरीर के भागों और अंगों तक ऑक्सीजनयुक्त रक्त प्रवाह नहीं हो पाता है।
जरूरी होने पर ही घर से निकले गंभीर बीमारियों के मरीज
कोरोना उन मरीजों के लिए अत्यधिक घातक है, जिनमें डायबिटीज, निमोनिया, हृदय संबंधी बीमारी, इंफेक्शन जैसी बीमारियां हैं। ऐसे रोगियों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। समय-समय पर अपनी जांच कराना चाहिए। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और मास्क पहनें। आवश्ययकता होने पर ही घर से बाहर निकलें। -डॉ. अजय पाल सिंह, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, जीआरएमसी
डायबिटीज और हृदय रोग से पीड़ित के लिए कोरोना घातक
लंबे समय से डायबिटीज और हृदय रोग से पीड़ित लाेगाें का हृदय कमजाेर पड़ जाता है। अस्थमा से पीड़ित रोगी के फेफड़े कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में जब इन लाेगाें काे कोरोना का संक्रमण हाेता है ताे ये जानलेवा हाे जाता है। ऐसे लोगों की सामान्य लोगों की अपेक्षा ठीक होने की संभावना कम होती है। इसी तरह जो लोग लंबे समय से बीड़ी और सिगरेट का सेवन करते हैं, उन पर भी कोरोना का संक्रमण जल्दी होता है। -डॉ. पुनीत रस्तोगी, विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी जीआरएमसी
डायबिटीज, हृदय रोग, निमोनिया है ताे काेराेना जानलेवा डेथ ऑडिट से खुलासा-
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