ग्वालियर
4 दिन पहले तीन जूनियर डॉक्टर और स्टाफ नर्स कोरोना पॉजिटिव होने के बाद बंद किया गया केआरएच का एसएनसीयू गुरुवार को चालू कर दिया गया। इलाज के लिए निजी अस्पतालों में शिफ्ट किए गए शिशुओं को भी फिर से यहां भर्ती किया गया है।
प्राइवेट में शिफ्ट हुए बच्चों को वापस बुला लिया। शाम तक 36 बच्चे एसएनसीयू में भर्ती हो गए थेशुक्रवार तक सभी बच्चे यहां वापस आ जाएंगे। इसी तरह 20 दिन से बंद कैथलैब भी चालू कर दी गई। गुरुवार को यहां 9 मरीजों की एंजियोप्लास्टी की गई। केआरएच के एसएनसीयू में ग्वालियर के निजी और सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले शिशुओं सहित अंचल भर से आए गंभीर शिशु इाज के लिए भर्ती किए जाते हैं। 30 बार्मर के इस एसएनसीयू में 90 से अधिक बच्चे भर्ती रहते हैं। यहां बेड भरने की दर 300 प्रतिशत है। रविवार शाम को यहां ड्यूटी करने वाले तीन जूनियर डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद एसएनसीयू में भर्ती 65 बच्चों में से 20 को मांओं को दे दिया था। 10 की हालत ठीक होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। अन्य बच्चों को जिला अस्पताल मुरार के एसएनसीयू में शिफ्ट करने के लिए पीडियाट्रिक के डॉक्टर न जिला अस्पताल के एसएनसीयू के डॉक्टरों से बात की। सूत्रों का कहना है क जिला अस्पताल प्रबंधन ने यह कहते हुए नवजात शिशुओं को लेने से मना कर दिया कि उनके यहां 30 बार्मर पर 32 बच्चे पहले से भर्ती हैं। मामले में जीआरएमसी में पीडियाट्रिक के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गौड़ ने जब सीएमएचओ डॉ. वीके गुप्ता को स्थिति से अवगत कराया तो सीएमएचओ ने आनन-फानन में इन बच्चों को शहर के निजी अस्पतालों में शिफ्ट करवाकर उन्हें संक्रमण से बचा लिया।
एसएनसीयू गुरुवार को फिर से शुरू हो गया। प्राइवेट में शिफ्ट हुए बच्चों को वापस बुला लिया। शाम तक 36 बच्चे एसएनसीयू में भर्ती हो गए थे। गौरतलब है कि जेएएच और केआरएच में कोरोना संक्रमण के कारण कई विभाग बंद किए जा चुके हैं, हालांकि हालात सामान्य होने पर कुछ दिन बाद इन्हें फिर से चालू कर दिया गया। जीआरएमसी में अभी तक 30 से अधिक डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ कोरोना से संक्रमित हो चुका है।
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