HS-NEWS (मध्य प्रदेश) सिंगरौली (राजकुमार सिंह/आरपी सोनी) :- प्राप्त जानकारी अनुसार अगर कोई आवेदन पत्र लेकर दंडा अधिकारी के पस पहुंचे और न्यायमूर्ति नीचे बैठे बाबू को कार्यवाही हेतु मौखिक निर्देशित करें तो रीडर को कार्यवाही करने हेतु पर्याप्त निर्देश माना जाता है वहीं अगर याचना पत्र मे दंडा अधिकारी का कार्यवाही हेतु मार्क हस्ताक्षर हो जिसके बाद भी उस पत्र मे कार्यवाही ना करते हुये आज-कल कर फाइल गुमने का बहाना करें तो शंका जायज है

गौरतलब हो जिले के चितरंगी खंड क्षेत्र निवासी अमर सिंह अध्यक्ष आदिवासी सहकारी मछुआ समिति मर्यादित देवरी प्रथम द्वारा 19 सितंबर 2019 को खसरा क्रमांक 261रकवा पांच हेक्टेयर 80 आरे के अलावा पंचायत क्षेत्र के विभिन्न तालाबों को खसरा में दर्ज करने हेतु पत्र तहसीलदार को दिया गया, पत्र मे उल्लेख माग अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के चलते तहसीलदार “प्रवाचक आर आई एसडीएम” को मार्क कर कार्यवाही मे लेने हेतु मूलतः वापस कर आवेदक को मौखिक निर्देशित किये कि पत्र मे उल्लेख मांग कार्य क्षेत्र से बाहर है एसडीएम साहब को दीजिए

जिसके बाद आवेदक अनुविभागीय अधिकारी राजस्व चितरंगी के पास पहुंचा जिस पत्र को गंभीरता से लेते हुए उपखंड अधिकारी तत्काल मार्क कर रीडर को कार्यवाही मे लेने हेतु निर्देशित किए किन्तु बाबू द्वारा आज दिनांक तक कोई कार्यवाही ना करते हुए आवेदन फाईल ना मिलने के बहाना किया जा रहा है जिसके चलते आदिवासी प्रतिनिधि अर्जुन सिंह ने पत्रकारों के समक्ष खंड प्रशासन को कोसते हुए कहे साहब हमारी खबर चला दीजिए सब को पता हो कि खंड न्यायालय चितरंगी में न्याय मिलता नहीं बिकता है हम गरीबों के पास खरीदने हेतु पैसा नहीं, नगद चढ़ोत्तरी चढ़ाएं बिना बाबुओं का कलम नहीं चलती वर्षो पहले पटवारी प्रतिवेदन के साथ आवेदन पत्र सरकारी बंधा को खसरा में दर्ज करने हेतु दिए थे जो हमारा फाइल न्यायालय से गायब कर दर्ज कराने कार्यवाही करने का हमें आश्वासन सुना-सुना कर परेशान किया जा रहा है
ऐसे में खबर के माध्यम उपखंड अधिकारी चितरंगी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए समिति अध्यक्ष द्वारा दिए गए माग पत्र मे उचित कार्यवाही की मांग की जाती है।
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