ग्वालियर
कानपुरमुठभेड़ में मारे गए विकास दुबे के गुर्गों को आश्रय देने के आरोप में यूपी एसटीएफ ने ग्वालियर से दो लोगों को उठाया है। एसटीएफ ने यह कार्रवाई दो दिन पहले की थी, इसकी भनक ग्वालियर पुलिस को नहीं लगी। शनिवार को कानपुर पुलिस ने इसकी सूचना ग्वालियर पुलिस को दी, तब जाकर मामला पता चला। विकास के रिश्तेदार शशिकांत उर्फ सोनू पांडेय व उसके साथी शिवम् यादव कानपुर के बिकरू गांव में डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या में नामजद हैं। बताया जाता है कि घटना के अगले ही दिन सोनू और शिवम् ग्वालियर आ गए थे। सोनू अपने चाचा ओमप्रकाश पांडे निवासी भगत सिंह नगर और चचेरे भाई अनिल निवासी सागरताल रोड स्थित सरकारी मल्टी में शिवम् के साथ शरण ली थी। सोनू के पिता प्रेमचंद्र पांडेय को पुलिस ने अगले दिन ही मुठभेड़ में मार गिराया था। सूचना मिलने के बाद ग्वालियर पुलिस शनिवार को हरकत में आई है। एटीएस व पुलिस ओमप्रकाश व अनिल के परिजनों से पूछताछ करने के लिए पहुंची। हालांकि दोनों आरोपितों के परिजनों का कहना है शशिकांत उनके परिवार का अवश्य है, लेकिन वह कभी यहां नहीं आया है।
9 जुलाई की सुबह यूपी एसटीएफ की टीम ने भगत सिंह नगर व सागरताल रोड पर स्थित सरकारी मल्टी में दबिश दी थी। शशिकांत व शिवम् तो एसटीएफ को नहीं मिले। पुलिस सोनू के चाचा ओमप्रकाश व उसके चचेरे भाई अनिल को उठाकर ले गई। कानपुर पुलिस ने चाचा भतीजे को दोनों आरोपितों को आश्रय देने के आरोप में नामजद कर दिया। शनिवार को इसकी सूचना ग्वालियर पुलिस को भी दी है।
… और ग्वालियर-चंबल पुलिस दावे करती रही
बिकरू कांड के बाद ग्वालियर रेंज के एडीजीपी राजाबाबू सिंह और चंबल रेंज की पुलिस ने विकास दुबे व उसके साथियों के आश्रय लेने के इनपुट मिलने के बाद पुलिस के हाइअलर्ट होने का दावा किया था। पुलिस ने रेंज की नाकेबंदी भी की थी। इसके बाद विकास दुबे के दो गुर्गे यहां फरारी काटकर निकल गए। एसटीएफ दो लोगों को उठा भी ली और पता भी नहीं चला।
सादे ड्रेस में हथियारबंद आए और दोनों को उठा ले गए, मारपीट भी की
ओमप्रकाश पांडेय यहां नोवा कंपनी में नौकरी करते हैं। पत्नी प्रेमलता के अलावा बेटी ज्योति व अमित हैं। ज्योति बीएससी प्रथम वर्ष में हैं। और अमित ने 11वीं की परीक्षा दी है। परिवार की माली हालत भी ठीक नहीं हैं। प्रेमलता पांडेय ने बताया कि वह मूल रूप से मैनपुरी के रहने वाले हैं। उसके पति ओमप्रकाश पांडेय के चार भाई हैं। चंद्रप्रकाश, रामविलास, प्रेमकुमार व उसके पति ओमप्रकाश पांडेय हैं। वह पिछले 15 साल से भगत सिंह नगर में रह रहे हैं। उनके जेठ चंद्रप्रकाश पांडेय का परिवार सरकारी मल्टी सागरताल पर रोड पर रहता है। प्रेमप्रकाश पांडेय बिकरू गांव कानपुर में रहते हैं। उनके परिवार जेठ ( प्रेमप्रकाश के परिवार) का कोई संबंध नहीं है और नहीं आना जाना है। 9 जुलाई की सुबह 6 बजे सिविल ड्रेस में हथियारों के साथ कुछ लोग आए। उसके पति के साथ मारपीट करते हुए अपने साथ ले गए। पूरे घर की तलाशी ली। मोबाइल फोन व फोटोग्राफर ले गए। यह लोग पूछ रहे थे कि शशिकांत और शिवम कहां हैं। पति को गाड़ी में डालकर ले जाने के बाद उनके भतीजे अनिल को भी पकड़कर ले गए। उसके बाद से उनका कुछ पता नहीं हैं। हमारा पूरा परिवार डरा हुआ है। प्रेमलता ने बताया कि शशिकांत व उसके साथी यहां नहीं आए। विकास को तो उन्होंने देखा तक नहीं है।
बेटा बोला हमें तो नहीं मारेगी पुलिस
अमित व ज्योति बहुत घबराएं हुए थे। सुबह मोतीमहल सीएम शिवराज सिंह चौहान से फरियाद करने के लिए गए थे, लेकिन वहां से पुलिस ने हमें गिरफ्तार करने की धमकी देकर भगा दिया। पिता बहुत सीधे हैं। उनका किसी से कोई संबंध नहीं रहा है। दोनों ने कहा कि हम लोगों की माली हालत भी ठीक नहीं हैं। घर में खाने तक को नहीं हैं। अगर अपराधियों का साथ देते तो हमारी यह हालत नहीं होती। ताऊ जरूर कानपुर में रहते हैं। गांव में ही उनसे मिले हैं। पड़ोस में रहने वाली वृद्धा ने बताया कि इनके यहां कभी कोई आता-जाता नहीं देखा हैं। यह लोग तो खुद परेशान रहते हैं। यहां 15 साल से रह रहे हैं। सरकारी मल्टी में अनिल के परिवार के संबंध में कोई कुछ नहीं बता रहा है। कोरोना पॉजिटिव निकलने के कारण पूरी मल्टी में सन्नाटा छाया हुआ है।
विकास भी 10 साल पहले यहां से गिरफ्तार हुआ था
पुलिस मुठभेड़ में मारे गए विकास दुबे को 10 साल पहले यूपी पुलिस ग्वालियर से पकड़कर ले गई थी। लेकिन उसके रिश्तेदार इंकार कर रहे हैं। पुलिस के पास भी ऐसी कोई जानकारी न
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