ग्वालियर-
डबरासिविल अस्पताल में फार्मासिस्ट कोरोना पॉजिटिव निकला है, तब से शहर के लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। दूरदराज क्षेत्र से जो मरीज इलाज कराने आ रहे हैं, उनको बिना इलाज के लौटना पड़ रहा है। जहां न तो मरीजों को इलाज मिल पा रहा है और न ही दवाएं मिल रही हैं। कोरोना केस निकलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने स्टाफ को होम क्वारंटाइन करा दिया हैं। रोजाना 150 से 200 मरीज इलाज के कराने के लिए सिविल अस्पताल पहुंचते हैं, जो बिना इलाज के लौटने पर मजबूर हैं।
गौरतलब है कि सिविल अस्पताल में कुछ चार दिन पहले एक फार्मासिस्ट की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकली थी। उसके बाद सिविल अस्पताल के स्टाफ के दो और लोग कोरोना पॉजिटिव निकल आए। इसके बाद से अस्पताल में मरीजों को इलाज मिलना बंद हो गया है। सिर्फ इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर जो दवाएं लिखते हैं वे दवाएं भी मरीजों को बाजार से खरीदनी पड़ रही है। इस समस्या को लेकर मरीजों का कहना है कि इतना बड़ा अस्पताल है। अगर औषधि वार्ड को सील किया गया है तो मरीजों के लिए अलग से दवाएं देने की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन को करनी चाहिए। लॉकडाउन के चलते पहले से ही लोग आर्थिक रूप से परेशान है। कई मरीज तो बाजार से दवाएं तक नहीं ले पाते। सिविल अस्पताल से शहर के अलावा पिछोर, बिलौआ, छीमक, टेकनपुर, चीनोर, भितरवार क्षेत्रों तक से मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। इनको पिछले कुछ दिनों से काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी लोगों की सैंपलिंग नहीं हो जाती और उनकी जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक स्टाफ से काम नहीं लिया जाएगा।
90 लोगों से ज्यादा का है स्टाफ-सिविल अस्पताल में डॉक्टर, नर्स, वार्ड केयर टेकर सहित 90 से ज्यादा लोगों का स्टाफ है। इसमें अधिकतर की सैंपलिंग हो चुकी है। कुछ लोग रह गए हैं, उनकी सैंपलिंग की जानी है। सैंपलिंग के बाद ही कुछ व्यवस्थाएं सुधर सकती हैं। कोरोना संक्रमित क्षेत्र होने के कारण सिविल अस्पताल में पर्चा काउंटर, जांच लैब, दवा स्टोर और ओपीडी की सेवाएं बंद हैं। इससे शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के मरीज भी परेशान हो रहे हैं।
फीवर क्लीनिक में स्क्रीनिंग बंद-कोरोना की जद में आने के बाद सिविल अस्पताल में बनाया गया फीवर क्लीनिक भी फिलहाल बंद है। वहां डॉक्टरों के नहीं होने से मरीजों की स्क्रीनिंग नहीं हो रही है। यही हाल चांदपुर चेकपोस्ट और सामुदायिक भवन में बनाए गए फीवर क्लीनिक का है। जहां कोरोना की प्रक्रिया बेहतर रूप से नहीं चल पा रही है। कोरोना का पता लगाने के लिए विभागीय टीमें सर्वे कर रही हैं। अब मौसम में आ रहे बदलाव के चलते सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के केस सामने आ रहे हैं। इनकी कोरोना संबंधी स्क्रीनिंग नहीं हो पा रही है।
डॉ. सुरेंद्र सोलंकी, बीएमओ, डबरा का कहना हे किकोरोना केस निकलने के बाद पूरे स्टाफ की सैंपलिंग करा रहे हैं। अधिकतर लोगों की जांच हो गई है, जो रह गए हैं उनकी जल्द कराएंगे। मरीजों की समस्या को देखते हुएजल्द ओपीडी और दवा वितरण शुरू करा सकते हैं।
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