ग्वालियर mp के गृह व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा रविवार को एक बार फिर ग्वालियर-चंबल के नाराज नेताओं को मनाने पहुंचे। रविवार की रात को उन्होंने पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य से डीडी नगर स्थित निवास पर मुलाकात की। डॉ. मिश्रा व लालसिंह आर्य के बीच बंद कमरे में 25 मिनट तक बातचीत हुई। चर्चा शुरू होने से पहले जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी भी कमरे से बाहर आ गए। चर्चा के बाद गृहमंत्री ने कहा कि लालसिंह मेरे मित्र हैं। हालांकि जब उसने पूछा गया कि दो दिन पहले भोपाल में भी मुलाकात हुई थी। फिर चर्चा के लिए उनके निवास पर आने की क्या आवश्यकता पड़ गई? इस पर गृहमंत्री ने चुप्पी साध ली। इस महीने में यह तीसरा रविवार है, जब नरोतत्म मिश्रा ने स्थानीय नेताओं से मुलाकात कर उनकी नाराजगी और शंकाओं का समाधान करने का प्रयास किया। इससे पहले वह पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा, जयभान सिंह पवैया, माया सिंह, नारायण सिंह कुशवाह के अलावा कांग्रेस से भोपाल में आए पूर्व मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर व पूर्व विधायक मुन्नाालाल गोयल से मुलाकात कर चुके हैं।
इसलिए महत्वपूर्ण है लालसिंह आर्य से मुलाकात
पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य की गोहद (अजा) विधानसभा से भाजपा के परंपरागत उम्मीदवार है। पिछले चुनाव में उन्हें रणवीर जाटव ने हराया था। इस सीट पर उपचुनाव होने हैं। यहां से सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक रणवीर जाटव का टिकट पक्का है। इसलिए गृहमंत्री की लालसिंह आर्य से उनके निवास पर आकर मुलाकात करना राजनीतिक कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आर्य का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा के छोटे से कार्यकर्ता से पारिवारिक संबंध हैं। पारिवारिक संबंध होने के कारण मुलाकात करने के लिए आए थे। मुझे पार्टी ने बहुत सम्मान दिया है। पांच बार टिकट दिया। तीन बार जीता भी। मंत्री भी बनाया और टिकट मुझे बगैर मांगे मिले थे। उन्होंने कहा कि अनुसूचित वर्ग की उपेक्षा तो कांग्रेस में होती है। दलित विरोधी मानसिकता के कारण आज फूल सिंह बरैया के वजह दिग्विजय सिंह को कांग्रेस ने राज्यसभा में भेजा है।
मैनेजमेंट गुरु माने जाते थे, अपना घर संभाल नहीं पाए
पूर्व सीएम कमल नाथ के सिंधिया तो एग्जस्ट हो गए 22 जयचंदों को क्या होगा संबंधी बयान का जवाब देते हुए गृहमंत्री ने कहा कि वे मैनजमेंट गुरु माने जाते थे। उनका मैनेजमेंट फेल हो गया। सरकार चला नहीं पाई। अपने घर व पार्टी को संभाल नहीं पाए। अब उनके पास कहने के लिए बचा ही क्या है।
प्रमोशन देने की बजाए पदनाम देने पर विचार
गृहमंत्री ने कहा कि लंबे समय से पुलिस विभाग में प्रमोशन नहीं मिले हैं। यह बात सही है। पुलिस अधिकारियों व जवानों को फिलहाल पदनाम देने पर विचार किया जा रहा है। अभी कोई घोषणा नहीं की है।
नहीं दिखी शारीरिक दूरी
पूर्व मंत्री आर्य के घर पर गृहमंत्री के पहुंचने पर 60 से अधिक कार्यकर्ता पहुंच गए।
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