ग्वालियर- कलेक्टर के निर्देश पर जिले के दो बड़े हॉट स्पॉट ठाकुर बाबा रोड व बंशीपुरा में कोरोना का संक्रमण इतनी तेजी से फैला कि उसे रोकना मुश्किल हो गया था। यहां दो संक्रमित व्यक्तियों से 81 लोग पॉजिटिव हो गए थे। लेकिन प्रशासन की सूझबूझ और स्वास्थ्य अमले की कार्य कुशलता ने तेजी से फैल रही संक्रमण की चेन पर ब्रेक लगा दिया। अब यहां पर जन-जीवन सामान्य हो चला है। लोगों में कोरोना का डर तो है पर अब उनके पास इससे निपटने का हौंसला भी है। इसलिए वह पूरी एहतिहात के साथ अपने काम-धंधे पर चल निकले हैं। इन स्थानों में पिछले दो-तीन हफ्ते में इन परिवारों से जुड़ा कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं पाया गया है।
डबराएसडीएम राघवेंद्र पांडे ,एसडीओपी उमेश तोमर, तहसीलदार नवनीत शर्मा, टीआई यशवंत गोयल ,और सीएमओ प्रदीप भदौरिया ,अपनी टीम के साथ सक्रिय रहे
इन दो क्षेत्रों ने जिले में बढ़ाई कोरोना की दहशत
ठाकुरबाबा रोड डबराः यहां रहने वाले गंगाराम रोहिरा परिवार की चार बेटियां लॉकडाउन के दौरान नोएडा, इंदौर, पुणे से वापस लौटीं थीं। प्रशासन का मनना था कि इनके कारण ही कोरोना संक्रमण इनके घर तक पहुंचा। गंगाराम रोहिरा की मौत के बाद पता चला कि वह कोरोना संक्रमित थे। प्रशासन को यह भी पता चला कि रोहिरा परिवार के पड़ोसी राधेश्याम गुप्ता के पिता का देहांत दो दिन पहले हुआ है और उन्हें भी सर्दी, जुकाम व श्वांस संबंधी परेशानी थी। तब प्रशासन ने दोनों परिवार व उनसे जुड़े लोगों की जांच करवाई तो करीब 32 लोग संक्रमित पाए। यह संख्या जिले में पहली बार देखने को मिली थी। यहां संक्रमण रोकना बड़ी चुनौती था।
बंशीपुराः बंशीपुरा में 30 मई को दिल्ली से आया दूधिया का भाई दिनेश कोरोना संक्रमित मिला। तब प्रशासन ने सामान्य तौर पर उसके घर वालों जांच करवाई। जांच रिपोर्ट आई तो प्रशासन के पैर तले से जमीन खिसक गई। उसका कारण था घर के 22 लोग संक्रमित पाए गए थे। जब पड़ोसियों की जांच करवाई तो वह भी संक्रमित मिले। कोरोना की इस चेन ने भी प्रशासन को बड़ी चुनौती दी थी।
प्रशासन व स्वास्थ्य टीम ने ऐसे ब्रेक की चेन
कंटेनमेंट जोनः प्रशासन ने ठाकुर बाबा रोड को पूरी तरह बंद कर, तीन किलोमीटर के दायरे को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया था। डबरा में लॉकडाउन के चलते बाजार तो पहले से ही नहीं खुल रहे थे लेकिन जब ठाकुर बाबा रोड पर कोरोना फैला तो शहर की सड़कों पर भी लोगों का बिना वजह निकला भी बंद कराया। इसी तरह बंशीपुरा में संक्रमण फैलने का खतरा देखते हुए 300 मीटर के दायरे में आवागमन प्रतिबंधित किया गया।
सर्वेः दोनों क्षेत्रों में घर-घर जाकर सर्वे करवाया गया। तात्कालिक बीमारी व गंभीर बीमारी, बुजुर्ग, बच्चे, महिला, बाहर से आने वालों की सूची तैयार की गई। 10 साल से कम और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की सूची तैयार की गई। इसमें यह भी देखा गया किस में किस तरह के लक्षण हैं। सर्वे रिपोर्ट पर लोगों की जांच कर घर में छिपे बैठे कोरोना को बाहर निकला गया।
सैंपलिंगः शुरुआत में तो ठाकुर बाबा रोड पर रहने वाले और उनके रिश्तेदारों की जांच करवाई गई। जब रिश्तेदार संक्रमित मिले तो सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जांच शुरू की गई। जिन लोगों में लक्षण दिखाई दिया उनकी जांच की गई या फिर जो भी रोहिरा व गुप्ता परिवार से मिला उनकी भी जांच करवाई। इसी तरह बंशीपुरा में संक्रमित युवक के परिवार व पड़ोसियों के साथ-साथ मिलने वालों की भी जांच करवाई।
निगरानीः डबरा और बंशीपुरा में जहां पर भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति मिला उसे कंटेनमेंट जोन बनाया गया। हालांकि इसका दायरा सीमित रखा गया पर निगरानी जरूर बढ़ाई गई। पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, राजस्व अमला सूचनाओं को जुटाने व हॉट स्पॉट में रहने वालों पर निगरानी रखे रही, जिससे कोरोना चेन को ब्रेक करने में मदद मिली।
जागरूकताः कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया गया। समाचार पत्र से लेकर सर्वे टीम द्वारा गली-मोहल्ले में लोगों को कोरोना से निपटने के उपाय बताए गए। संक्रमण से कैसे बचना है इसके लिए मास्क, सैनिटाइजर व सुरक्षुत शारीरिक दूरी बनाने के लिए जागरूक किया गया। कोरोना की चेन ब्रेक करने में यह भी अहम शस्त्र बना।
यह समय चुनौतियों से भरा है। कोरोना संक्रमण से बचाव रखने के लिए हर विभाग अपने स्तर पर काम कर रहा है। पर कोरोना की रोकथाम के चार सूत्र हैं- सर्वे, सैंपलिंग, निगरानी और जगरूकता। यही सूत्र कोरोना की रोकथाम में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं।
कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
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