ग्वालियर- कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ज्यादा से ज्यादा सैंपलिंग पर जो दे रही है और काेराेना पाॅजिटिव मरीजाें के इलाज काे लेकर बेहद सतर्कता बरती जा रही है, लेकिन किन लोगों की सैंपलिंग की जाए, इसे लेकर इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) 17 मार्च से अब तक चार बार गाइडलाइन भी जारी कर चुकी है। जब भी नई गाइडलाइन जारी की गई तो दावा किया गया कि उसमें सैंपलिंग का दायरा बढ़ाया गया, लेकिन गत 18 मई को जारी गाइडलाइन में कहा गया कि बिना लक्षण वाले लोगों की सैंपलिंग का जिक्र नहीं किया गया है। जबकि ग्वालियर-चंबल में अभी तक 80 फीसदी एेसे लाेग संक्रमित पाए गए जाे रेडजाेन से अाए अाैर उनमें काेई लक्षण नहीं थे।
इसी तरह संक्रमित मरीजों को डिस्चार्ज करने के लिए गाइडलाइन में किए गए परिवर्तन भी डाक्टर्स के लिए परेशानी का सबब बनेंगे।
10 दिन बाद बिना दूसरे टेस्ट के मरीज को घर भेजा जाए
बिना लक्षण वाले लोगाें के टेस्ट करने का आदेश नहीं
गाइडलाइन कहती है कि बिना लक्षण वाले मरीज काे 10 दिन में दूसरा टेस्ट किए बिना घर भेज दिया जाए। लेकिन इसका क्या नतीजा हाे सकता है, ये शहर में पिछले चार दिन में केस से देखा जा सकता है। इन दाे मरीजाें काे दूसरे टेस्ट का इंतजार किए बिना डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन इनमें फिर से संक्रमण पाया गया। नई गाइड लाइन के बाद बुधवार को सिर्फ 309 लोगों के सैंपल लिए गए। जबकि इससे पहले औसतन 450-500 लोगों के सैंपल लिए जा रहे थे।
मामले में आईसीएमआर (जबलपुर) के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. तापस चकमा का कहना है कि गाइडलाइन बनाने का काम आईसीएमआर के हेडक्वार्टर में किया जाता है। इस पर हम लोग टिप्पणी नहीं कर सकते।
सैंपलिंग के लिए 3 माह में 4 गाइडलाइन
पहली गाइडलाइन
17 मार्चः विदेश से आए उन सभी लोगों के टेस्ट किया जाए, जिनमें बीमारी के लक्षण दिखें। संक्रमितों के संपर्क में आए सभी लोगों का भी टेस्ट तभी करें जब उनमें बीमारी के लक्षण दिखें। यहां तक की स्वास्थ्यकर्मियों में भी लक्षण दिखने की स्थिति में ही टेस्ट किया जाए।
दूसरी गाइडलाइन
20 मार्चः अस्पताल में भर्ती उन मरीजों का भी टेस्ट किया जाए, जिन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही हो या सर्दी, बुखार, कफ, नाक से पानी आने की समस्या हो। संक्रमितों के संपर्क वे सभी लोग जिनमें बीमारी के लक्षण नहीं दिख रहे हों। (17 मार्च को जारी गाइडलाइन के बिंदु भी जोड़े)
तीसरी गाइडलाइन
9 अप्रैलः हाॅटस्पाट अथवा माइग्रेशन सेंटर में आने वाले सभी लोगों का बीमार होने के सात दिन के भीतर टेस्ट किया जाए। सात दिन बाद रेपिड एंटी बाडी टेस्ट किया जाए। यदि टेस्ट पाॅजिटिव आए तो आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाए।
(20 मार्च को जारी गाइडलाइन के बिंदुओं को और जोड़ा गया)
चौथी गाइडलाइन
18 मईः कंटेनमेंट जोन में अतिआवश्यक काम में लगे कर्मचारियों का टेस्ट किया जाए, जिनमें बीमारी के लक्षण हों। संक्रमित के संपर्क में आए वे सभी लोग, जिनमें बीमारी के लक्षण नहीं दिख रहे हों। बुखार, खांसी, जुकाम के लक्षण वाले प्रवासी या मजदूरों की जांच की जाए।
बाहर से आ रहे बिना लक्षण वाले लोगों की सैंपलिंग नहीं
ग्वालियर-चंबल अंचल में चार शहर (इंदौर, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद) जिन्हें रेड जोन माना गया है, से आए लोगों में सबसे ज्यादा संक्रमण की पुष्टि हुई है। गौर करने वाली बात यह है कि 80 फीसदी से अधिक संक्रमितों में बीमारी के कोई लक्षण नहीं है। फिर भी गाइडलाइन में रेड जोन से आ रहे लोगों की सैंपलिंग का कोई प्रावधान नहीं करना संक्रमण को फैलने के लिए आमंत्रण देने जैसा है। यहां बता दें कि 9 अप्रैल को जारी गाइडलाइन में बाहर से आ रहे लोगों की सैंपलिंग का प्रावधान तो किया है लेकिन केवल उन्हीं लोगों का, जिनमें बीमारी के लक्षण दिख रहे हों।
पहले डिस्चार्ज करने से पहले कर रहे थे तीन टेस्ट, अब एक
कोरोना संक्रमित को डिस्चार्ज करने के संबंध में बनाई गई गाइडलाइन भी डाॅक्टर्स के लिए परेशानी बन रही है। पहले मरीज को डिस्चार्ज करने से पहले दो बार रिपीट टेस्ट करते थे। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद डिस्चार्ज करते थे, लेकिन अब जिन मरीजों में बीमारी के लक्षँ नहीं है, उन्हें 10 दिन बाद दूसरा टेस्ट किए बिना ही डिस्चार्ज करने की गाइडलाइन बनाई गई है। हालांकि, ग्वालियर के डाॅक्टर्स सावधानी बतौर, संक्रमितों को डिस्चार्ज करने से पहले दूसरा टेस्ट भी करा रहे थे। इसी का परिणाम यह निकला कि दो मरीजों की रिपोर्ट डिस्चार्ज होने के बाद पाॅजिटिव आई
बदलती गाइडलाइनआईसीएमआर की से संक्रमण कम हाेगा या और फैलेगा..पुनर्विचार की जरूरत
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