भोपाल- मप्र में तीन मार्च से चल रहा सियासत का शह और मात का खेल शुक्रवार को कमल नाथ के इस्तीफे के साथ खत्म हो गया। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था। इसके बाद से ही आशंका थी कि कमलनाथ फ्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफा दे देंगे। श्ुाक्रवार सुबह होते-होते तस्वीर साफ भी होने लगी थी। सीएम हाउस में दोपहर 12 बजे कमल नाथ ने मीडिया के सामने घोषणा की कि वह इस्तीफा देने जा रहे हैं। करीब एक घंटे बाद उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
एक महाराज और 22 लोभियों ने भाजपा के साथ मिलकर लोकतंत्र की हत्या की :
कमलनाथ ने कहा – 11 दिसंबर 2018 को मध्यप्रदेश विधानसभा का परिणाम आया। मेरे 40 साल के राजनीतिक जीवन में मैंने हमेशा विकास में विश्वास रखा है। भाजपा को 15 साल मिले। मुझे 15 महीने मिले। ढाई महीने लोकसभा चुनाव और आचार संहिता में गए। प्रदेश का हर नागरिक गवाह है कि भाजपा को प्रदेशहित में किए गए मेरे काम रास नहीं आए। बौखलाहट में वे मेरे खिलाफ साजिश करते रहे। आज हमारे 22 विधायकों को प्रलोभन देकर बंधक बनाने का काम किया है। करोड़ों रुपए खर्चकर प्रलोभन का खेल खेला गया। आज पूरा प्रदेश इसका गवाह है। एक महाराज और उनके द्वारा प्रोत्साहित 22 लोभियों के साथ मिलकर भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या की है। प्रदेश की जनता के साथ धोखा करने वाले इन लोभियों और बागियों को जनता कभी माफ नहीं करेगी। – कमल नाथ
नाथ बोले- दो दिन पता चल जाएगा किसने पैसा दिया
कमल नाथ ने कहा- 9 मार्च को 16 विधायकों को लेकर ले गए थे। किसने पैसा दिया, किसने दबाव डाला, ये समय के साथ सामने आ जाएगा। आज के बाद कल आता है, कल के बाद परसों भी आता है। परसों आएगा।
1 0 मार्च को 22 विधायकों ने दिए थे इस्तीफे :
सरकार ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद उनके समर्थक 6 मंत्रियों और 16 विधायकों ने 10 अप्रैल को होली के दिन स्पीकर को ईमेल से अपने इस्तीफे सौंप दिए थे। इसके बाद से सरकार विधायकों से मिलने की कोशिश में थी। बेंगलुरू में ठहरे इन विधायकों ने दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के किसी भी नेता से बात करने से इंकार कर दिया था।
मप्र विधानसभा का गणित :
कुल सीटें – 230
खाली सीटें – 2
इस्तीफे – 22
इसके बाद कुल सीटें – 206
बहुमत – 104
किसके पास कितने विधायक
भाजपा – 107
कांग्रेस – 92
निर्दलीय – 4
सपा – 1
बसपा – 2
नाथ का इस्तीफा क्यों …
कांग्रेस के 22 विधायकों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस के पास कुल संख्या 114 थी, जो घटकर 92 बची थी। जबकि 230 विधायकों वाले सदन में बहुमत के लिए 116 विधायक चाहिए थे। 2 सीटें खाली होने की स्थिति में 115 सीटों की जरूरत थी, जो कांग्रेस के पास 4 निर्दलीयों और सपा के 1 और बसपा के 2 विधायकों को मिलाने पर भी नहीं हो रही थीं।
‘मौसम’ बदलते ही बदले नारायण त्रिपाठी कहा – मैं भाजपा में था और भाजपा में ही रहूंगा। इससे पहले सियासी ड्रामे के बीच मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी लगातार कई दिनों तक सीएम हाउस गए। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद उन्होंने भाजपा पर सवाल भी खड़े किए थे। कहा था – मध्यप्रदेश में भाजपा लोकतंत्र की हत्या कर रही है। उन्होंने कहा था कि कमल नाथ अच्छा काम कर रहे हैं। पहले बिजली के लाखों रुपए के बिल आते थे। अब 100 रुपए ही बिल आ रहा है। वर्तमान परिदृश्य में राजनीति में सिद्धांत नहीं हैं।
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