ग्वालियर/भोपाल-ग्वालियरकेज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद उनके समर्थक मंत्री-विधायकों के सरकार के खिलाफ बागी हो जाने से जो संकट के बादल छाये हैं, उससे उबरने के लिएगत दिवस दिनभर मुख्यमंत्री निवास में रणनीति बनाई जाती रही। मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने कोर ग्रुप के साथ बैठे रहे। कभी बागी मंत्रियों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कराने की रणनीति बनी तो कभी बागी विधायकों को तोड़ने के लिए उनसे कई स्तर पर प्रयास किए गए। भाजपा की कुछ कमजोर कड़ियों को तलाशने की भी कोशिशें हुईं, जिनमें कुछ विधायकों को चिन्हित भी किया गया है।
14 महीने की कमलनाथ सरकार पर कांग्रेस के मजबूत स्तंभ ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ छोड़ देने से जो संकट आया है, उससे उबरने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने कोर ग्रुप के साथ बैठक कर रणनीति तैयार कर रहे हैं।
कोर ग्रुप में राज्यसभा सदस्य और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और विवेक तन्खा प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, जबकि कमलनाथ के साथी मंत्री डॉ. गोविंद सिंह, प्रियव्रत सिंह, तरुण भनोत, जीतू पटवारी, जयवर्धन सिंह सहित पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा व सिंधिया विरोधी माने जाने वाले प्रताप भानु शर्मा इसका हिस्सा बन गए हैं।
देर शाम को सरकार के छाये संकट से मुक्त कराने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया भी मुख्यमंत्री निवास पर पहुंच गए। इन सभी नेताओं ने मिलकर सरकार को खतरे से सुरक्षित बाहर निकालने की रणनीति पर चर्चा की।
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री ने दोपहर करीब साढ़े ग्यारह बजे अपने विधायकों को भाजपा की घेराबंदी से दूर रखने के लिए जयपुर भेज दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कोर ग्रुप के साथ बैठकों का दौर शुरू किया, जो देर शाम तक चला।
सूत्रों ने बताया कि राज्यसभा चुनाव में मतदान की स्थिति बनने पर 26 मार्च को विधानसभा सदस्यों के तात्कालिक आंकड़ों पर भी मंथन किया गया, जिसमें अपने बागी मंत्री व विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मतदान से दूर रखने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।
बेंगलुरु गए सिंधिया समर्थक कांग्रेस विधायकों में से कुछ को आकर्षक वादों के भरोसे वापस बुलाने के लिए कुछ लोगों को जिम्मेदारी दी गई। इनमें विधायकों के परिजनों या रिश्तेदारों, मित्रों के नजदीकियों का पता लगाने के लिए भी कुछ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आंकड़ों में अभी सरकार खतरे में
सिंधिया के जाने के बाद उनके समर्थक मंत्रियों-विधायकों के कमलनाथ सरकार से दूरी बनाने की वजह से सरकार खतरे में दिखाई दे रही है। अभी कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं, जिनमें से 19 विधायक बेंगलुरु में हैं। तीन विधायक बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंषाना व मनोज चौधरी वहां नहीं होने के बाद भी कांग्रेस के खिलाफ बताए जा रहे हैं।
इस तरह आज की स्थिति में कमलनाथ सरकार के पक्ष में कांग्रेस के 92 विधायक हैं। चार निर्दलीय और तीन बसपा-सपा के विधायकों को भी इसमें जोड़ लिया जाए तो 99 विधायकों का कमलनाथ सरकार को समर्थन है।
अगर कांग्रेस सिंधिया समर्थक छह मंत्रियों को अयोग्य करार दिलाने और 16 विधायकों को राज्यसभा चुनाव के मतदान से दूर रख पाने में सफल रही तो उसे फ्लोर टेस्ट में 104 विधायकों का आंकड़ा जुटाना होगा। इसके लिए भाजपा में सेंधमारी की रणनीति बनाई जा रही है। इनमें पहले साथ दे चुके नारायण त्रिपाठी व शरद कोल के अलावा बुंदेलखंड और महाकोशल के तीन अन्य विधायक बताए जा रहे हैं।
सरकार को खतरा नहीं
सरकार को कोई खतरा नहीं है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ मौजूदा हालातों पर चर्चा की जाएगी।
– दीपक बाबरिया, महासचिव और प्रदेश प्रभारी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी
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