भोपाल- कमल नाथ कैबिनेट के 20 मंत्रियों ने मप्र में बदले सियासी घटनाक्रम के बीच देर रात अपने इस्तीफे मुख्यमंत्री को सौंप दिए। सभी ने कमल नाथ पर अपनी आस्था जताई और मंत्रिमंडल विस्तार उनके विवेक पर छोड़ दिया। नाथ ने सभी इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। उन्होंने कहा- माफिया के सहयोग से अस्थिर करने वाली ताकतों को सफल नहीं होने दूंगा। यह सियासी उठापटक दोपहर बाद उस वक्त शुरू हुई, जब खबर मिली कि सिंधिया समर्थक 6 मंत्री और 11 विधायक बेंगलुरू पहुंच गए हैं। इसके बाद सीएम हाउस में गतिविधियां तेज हो गर्इं। शाम होते-होते राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा, दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी समेत तमाम मंत्री और कांग्रेस नेताआें ने सीएम के साथ रणनीति बनाई। रात 11 बजे तक चले मंथन के बाद कमल नाथ कैबिनेट के 28 में से 20 मंत्रियों ने सीएम को इस्तीफा सौंप दिया। सीएम ने इसे स्वीकार भी कर लिया। मुख्यमंत्री ने आज भोपाल में कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई है। इस सियासी घमासान के चलते राज्यपाल अपनी पांच दिन की छुट्टियां निरस्त कर वापस आ सकते हैं।
माफिया के सहयोग से अस्थिर करने वाली ताकतों को सफल नहीं होने दूंगा-नाथ
सियासी घटनाक्रम के चलते मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि माफिया के सहयोग से अस्थिर करने वाली ताकतों को सफल नहीं होने दूंगा। मेरे लिए सरकार होने का अर्थ सत्ता की भूख नहीं, जन सेवा का पवित्र उद्देश्य है। 15 वर्षों तक भाजपा ने सत्ता को सेवा का नहीं भोग का साधन बनाए रखा था वो आज भी अनैतिक तरीके से मध्यप्रदेश की सरकार को अस्थिर करना चाहती है। नाथ ने कहा कि सौदेबाजी की राजनीति मध्यप्रदेश के हितों के साथ कुठाराघात है। 15 साल में भाजपा के राज में हर क्षेत्र में माफिया समानांतर सरकार बन गया था। प्रदेश की जनता त्रस्त थी और उसने माफिया रूप से छुटकारा पाने के लिए कांग्रेस को सत्ता सौंपी। मैंने जनता की अपेक्षा पर माफिया के खिलाफ अभियान चलाया। माफिया के सहयोग से भाजपा कांग्रेस की सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है।
अचानक फोन बंद कर गायब हो गए थे मंत्री
सोमवार दोपहर सिंधिया समर्थक मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया, इमरती देवी, डॉ.प्रभुराम चौधरी, तुलसी सिलावट, गोविंद राजपूत और प्रद्युमन सिंह तोमर समेत 11 विधायक बेंगलुरू पहुंच गए। फोन स्विच आॅफ थे।
बेंगलुरू में कर्नाटक के सीएम येदुरप्पा के बेटे ने मंत्रियों और विधायकों की सुरक्षा और ठहरने की जिम्मेदारी संभाली। उधर सीएम ने सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात की और भोपाल वापस लौटे।
इस्तीफे क्यों… सिंधिया गुट की नाराजगी के बाद सरकार के अस्थिर होने का खतरा था। कमल नाथ के प्रति भरोसा जाहिर करते हुए मंत्रियों ने इस्तीफे दिए, ताकि आलाकमान को किसी भी तरह के दबाव में न आने का साफ संकेत पहुंचाया जा सके।
विस्तार क्यों… मंत्रियों ने इस्तीफे के साथ ही नाथ को मर्जी के अनुसार कैबिनेट विस्तार की आजादी दे दी है। इसके जरिए कमल नाथ असंतुष्टों को मनाकर सरकार को मजबूती से कायम रख सकते हैं। असंतुष्टों में सिंधिया गुट के साथ ही हाल ही में बगावत करने वाले सपा, बसपा और निर्दलीय विधायक भी हैं।
सोमवार को मप्र का सियासी रंग अचानक ही नहीं बदला। सूत्रों के अनुसार राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा के बेटे भाजपा सांसद दुष्यंत सिंह से सिंधिया की दिन में मुलाकात हुई। इसके बाद सिंधिया के भाजपा में जाने की चर्चाएं तेज हो गर्इं। बदले राजनैतिक परिदृश्य में सिंधिया की तरफ से तो कोई बयान नहीं आया, लेकिन सिंधिया समर्थक 17 विधायकों और मंत्रियो ंके बेंगलुरू में होने के बाद चर्चाओं को और बल मिला। भाजपा की तरफ से इस पर कोई बयान नहीं आया। चर्चाएं चलती रहीं कि सिंधिया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था।
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