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कितने मैरिज गार्डन भूमि विकास नियम का पालन कर रहे हैं, संचालक खुद बताएं-हाईकोर्ट

ग्वालियर।

हाईकोर्ट ग्वालियरकी युगल पीठ ने मैरिज गार्डनों संचालकों को फिर से शपथ पत्र पेश करने का आदेश दिया है। इस शपथ पत्र पर संचालकों को बताना होगा कि वे भूमि विकास नियम 2012 में बनाए गए कितने नियमों का पालन कर रहे हैं। कितनों का नहीं। यह जानकारी देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी चेतवानी दी कि शादियों का सीजन चल रहा है। इसलिए नरमी बरते हुए हैं, लेकिन सीजन खत्म होने के बाद नियमों के पालन के लिए सख्ती दिखाई जाएगी।

जिला प्रशासन ने भूमि विकास नियम का हवाला देते हुए शहर के 57 मैरिज गार्डनों को सील कर दिया था। ये मैरिज गार्डन 10 हजार स्क्वायर मीटर से कम एरिया में संचालित थे। मैरिज गार्डनों के सील होने के बाद संचालकों में हड़कंप मच गया। उसके बाद मैरिज गार्डन संचालकों ने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत मैरिज गार्डनों को सील किया जा रहा है। मैरिज गार्डन एसोसिएशन की ओर से रिव्यू पिटीशन दायर की है। रिव्यू याचिका में तर्क दिया कि भूमि विकास नियम 2012 गार्डनों पर लागू नहीं हो सकता है। इस नियम के अनुसार गार्डन तैयार किया गया तो गरीब लोग उसका भार नहीं उठा पाएंगे। जनहित याचिका में जो आदेश दिए गए हैं, उनमें भी बदलाव किया जाए। जिला प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि हमारे पास ऐसे लोगों के आवेदन आए हैं, जिनके घर में शादी समारोह हैं। मैरिज गार्डन सील होने से परेशानी हो रही है। कार्ड भी बंट चुके हैं। हाईकोर्ट ने 2012 से पहले बने मैरिज गार्डनों को राहत दे दी थी, लेकिन 2012 के बाद बने मैरिज गार्डनों से शादी बुकिंग की शपथ पत्र जानकारी मांगी थी। इन गार्डनों को भी राहत मिल गई। 120 मैरिज गार्डन संचालकों ने बुकिंग की जानकारी शपथ पत्र पर पेश कर दी। 20 जून तक बुकिंग की जानकारी दी है। कोर्ट ने फिर से शपथ पत्र मांगा है।

मैरिज गार्डन के लिए बन चुके हैं नियम

नगर निगम के अधिवक्ता रवीन्द्र दीक्षित ने तर्क दिया कि कोर्ट में जो अवमानना याचिका दायर की गई है, उस याचिका में वर्ष 2009 के जनहित याचिका के पालन की मांग की गई। जनहित याचिका के आदेश के बाद वर्ष 2012 में नए नियम बन चुके हैं।

– जब नए नियम बन गए हैं, तो अवमानना याचिका लगाने का औचित्य नहीं रहता है। जो अवमानना यायिका दायर की है, वह सुनवाई योग्य नहीं है।

– कोर्ट ने इस बिंदु पर अगली बार बहस की तारीख निर्धारित की है। 28 फरवरी को याचिका की फिर से सुनवाई होगी।

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