ग्वालियर- मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को शैक्षणिक ऑटोरिक्शा के संबंध में विस्तार से जानकारी देने का निर्देश दिया है। जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस विशाल मिश्रा की डिवीजन बेंच ने अवधेश भदौरिया की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रमुख सचिव को आरटीओ द्वारा शैक्षणिक ऑटोरिक्शा के संबंध में दी गई अनुमति की जानकारी भी प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
दरअसल, स्कूली वाहनों में हो रही ओवरलोडिंग पर रोक लगाने की मांग को लेकर पूर्व में जनहित याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में शासन को नियम बनाने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने यह सुझाव भी दिया था कि स्कूली ऑटो में 12 वर्ष के कम आयु के अधिकतम पांच बच्चों को भी बैठने की अनुमति दी जाए। इसके बाद भी स्कूली वाहनों में बच्चों के बैठने की क्षमता निर्धारित नहीं करने पर अवमानना याचिका दायर की गई।
30 नवंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने पूछा था कि क्यों ना शैक्षणिक वाहनों की सूची से तीन पहिया ऑटोरिक्शा को बाहर कर दिया जाए। इस मामले में प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि शासन द्वारा तैयार की गई विद्यार्थियों के सुरक्षित परिवहन हेतु शैक्षणिक वाहनों के नियंत्रण एवं विनियमन योजना-2019 में शैक्षणिक ऑटोरिक्शा की श्रेणी बनाई गई हैं। इसमें उन ऑटोरिक्शा को शामिल किया गया है, जिनमें वाहन चालक के अलावा 6 लोग बैठ सकते हैं।
शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों से बच्चों को स्कूल ले जाने में यह वाहन काफी सुविधाजनक होते हैं। जिन ऑटोरिक्शा में केवल तीन लोगों के बैठने की क्षमता होती हैं, उन्हें इस श्रेणी से बाहर रखा गया है। प्रमुख सचिव के जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए कोर्ट ने उनसे शैक्षणिक ऑटोरिक्शा के संबंध में विस्तार से बताने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 दिन बाद होगी।
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